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पांच साल लंबी लड़ाई के बाद मिली जमीन

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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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सीबीएसई को पांच साल की लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार जमीन मिल गई है। बोर्ड के पूरा दाम देने के वादे के बावजूद सरकार जमीन नहीं दे पा रही थी। सीबीएसई क्षेत्रीय अधिकारी रणबीर सिंह की लगन से आखिरकार कामयाबी मिली। जल्द ही बोर्ड का दफ्तर बनना शुरू हो जाएगा। यहां न केवल सीबीएसई के सभी काम होंगे बल्कि प्रशिक्षण भी दिए जाएंगे।
सीबीएसई ने वर्ष 2013 में देहरादून में क्षेत्रीय कार्यालय खोला था। इस कार्यालय में उत्तर प्रदेश के भी 21 जिलों के स्कूलों को शामिल किया गया था। पांच साल से सीबीएसई को राज्य सरकार की ओर से कार्यालय के लिए जमीन नहीं मिल पाई थी। जबकि सीबीएसई की ओर से साफ किया गया है कि जमीन की कीमत अदा की जाएगी। इससे पहले सहस्त्रधारा रोड पर एक जमीन मिली थी लेकिन वह सीबीएसई दिल्ली के अधिकारियों ने रिजेक्ट कर दी। इसके बाद लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सीबीएसई के अनुरोध पर शासन स्तर से अब दून विश्वविद्यालय के निकट तीन एकड़ जमीन चिन्हित की। अपर सचिव जेपी जोशी ने इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजकर रिपोर्ट तलब की थी। बोर्ड के इस कार्यालय के लिए आखिरकार डीएम ने रिपोर्ट भेजी और शासन ने आगे की कार्रवाई शुरू की। जल्द ही जमीन सीबीएसई के हवाले कर दी जाएगी।
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यह होगा फायदा
सीबीएसई के इस कार्यालय में न केवल बोर्ड के संबद्धता से लेकर परीक्षा तक के सभी काम होंगे बल्कि यहां प्रशिक्षण का भी काम किया जाएगा। पूरे रीजन के शिक्षकों के लिए यहां प्रशिक्षण केंद्र खोला जाएगा। वर्तमान में देहरादून रीजन में करीब 1250 स्कूल संबद्ध हैं। इन सभी स्कूलों से जुड़े काम अब नियत तौर पर यहीं से होंगे। न केवल उत्तराखंड को लाभ होगा बल्कि पश्चिमी यूपी के लिए भी इलाहाबाद के मुकाबले यहां काम कराना सुविधाजनक होगा।
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अमर उजाला ने चलाया अभियान
सीबीएसई की जमीन मामले पर अमर उजाला ने लगातार अभियान चलाया। इसके तहत जमीन मिलने में आने वाली सरकारी अड़चनों को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। आखिरकार बोर्ड को जमीन मिली तो इससे देहरादून और उत्तराखंड को लाभ मिलेगा।
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