ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
बिल्डरों और डीलरों की मनमानी से पीड़ित ग्राहकों को रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट (रेरा) लागू होने के बाद भी न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। बिल्डरों के खिलाफ उत्तराखंड हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (उडा) में गठित कमेटी को 45 ग्राहकों ने शिकायतें की हैं। कमेटी नोटिस भेजने की कार्रवाई तक सीमित है। सुनवाई में बिल्डरों के वकील तारीख पर तारीख बढ़ा रहे हैं। जिससे पीड़ितों को न्याय के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
बिल्डर ग्रुप हाउसिंग एवं व्यावसायिक प्रोजेक्ट शुरू करते वक्त ग्राहकों को लुभाने के लिए तरह-तरह की सुविधाएं देने का दावे करते हैं। तमाम माध्यमों से प्रचार प्रसार करते हैं, ताकि ग्राहक उनके प्रोजेक्ट में बुकिंग कराएं। ग्राहकों के फ्लैट और दुकान की बुकिंग के बाद भुगतान अनुबंध पत्र में प्रोजेक्ट के पूरे होने, कब्जा हस्तांतरित करने के अलावा बुनियादी सुविधाओं का जिक्र होता है। लेकिन, अधिकांश प्रोजेक्ट न तो समय पर पूरे होते हैं और न ही ग्राहकों को सुविधाएं दी जाती हैं। ग्राहक बिल्डरों के चक्कर काटते रहते हैं। बिल्डरों की इन्हीं मनमानी को रोकने के लिए रेरा अधिनियम लागू किया है। उत्तराखंड में एक मई 2017 से इसे लागू किया है। इसमें उडा में बिल्डरों, डीलरों का पंजीकरण अनिवार्य है। उडा में ही ग्राहकों की शिकायतों की सुनवाई और उनके समाधान कराने के लिए कमेटी गठित की गई है।
कमेटी में उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों से बिल्डरों के खिलाफ 45 शिकायतें दर्ज हुई हैं। सर्वाधिक शिकायतें ऊधमसिंह नगर, देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल जिले से हैं। कमेटी ने 35 बिल्डरों को नोटिस जारी किए हैं, ताकि ग्राहकों की समस्या का निस्तारण हो सके। सुनवाई में बिल्डर नहीं पहुंचे रहे हैं, जबकि शिकायतकर्ता तारीखों से परेशान हैं। देहरादून निवासी शिकायत कर्ता डेविड बताते हैं, शहसत्रधारा में प्राइवेट बिल्डर के हाउसिंग प्रोजेक्ट से 2012 में टू बीएचके बुक कराया था। 52 लाख रुपये बिल्डर को भुगतान किया। बिल्डर ने 2015 में प्रोजेक्ट पूरा कर कब्जा हस्तांतरित करने का वादा किया था। अभी तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ है। उडा में शिकायत करने के बाद हर तारीख में नई तारीख मिल रही है।
देहरादून के मिहिर और आसिफ खान के मुताबिक उन्होंने भी राजपुर रोड में शापिंग कांपलेक्स में दुकानें बुक कराई थी। दुकानों की कीमत 48-48 लाख रुपये भुगतान किया गया। शापिंग कांपलेक्स 2015 में पूरा होना था, लेकिन निर्माण अभी तक लटका है। अनुबंध पत्र में निर्धारित समय तक कब्जा हस्तांतरित न करने पर बिल्डर ने भुगतान राशि पर ब्याज देने का वादा किया है। बिल्डर बातचीत करने को तैयार नहीं है। अपने वकील से मिलने की सलाह देता है। इसी तरह दूसरे ग्राहक भी बिल्डर की मनमानी से परेशान हैं और न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं।