रिस्पना नदी के संरक्षण पर किया गया विचार विमर्श
-- परमार्थ निकेतन में स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि की अध्यक्षता में हुई बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
मुनिकीरेती । स्वर्गाश्रम स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम में रिस्पना नदी के पुनर्जीवित करने को लेकर बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न संगठनों, विभागों के अधिकारियों व इको टास्क फोर्स के सदस्यों ने प्रतिभाग किया। बुधवार को आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें रिस्पना नदी को पुनर्जीवित करने को लेकर विचार विमर्श किया गया। इस मौके पर स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि रिस्पना नदी पूर्व में ऋषिपर्णा के नाम से जानी जाती थी। यह नदी देहरादून की धरोहर है, यदि इस नदी का संरक्षण कार्य नहीं किया गया तो यह खत्म हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि विश्व की सभी सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारों पर ही हुआ है। रिस्पना का भी देहरादून के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनका कहना है कि मोक्षदायिनी गंगा के संरक्षण के लिए पहले रिस्पना नदी को पुनर्जीवित करना होगा। उन्होंने रिस्पना के साथ ही बिंदाल नदी को प्राणवान बनाने पर जोर दिया। बताया कि तैयार की गई कार्ययोजना पर दो सप्ताह बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ विमर्श करेगा। इस दौरान सभी ने रिस्पना और बिंदाल नदियों के संरक्षण के लिए कार्य करने की शपथ ली। इस मौके पर ईको टास्कफोर्स के कर्नल एचएस राणा, कचरा प्रबंधन से लक्ष्मण शास्त्री, अभिजय नेगी, विनोद बगियाल, करण कपूर, विशाल पांडे, राहुल गुरू, सुरेंद्र पांडे आदि मौजूद थे।