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कर्मों के आधार पर हो व्यक्ति का आकलन : राज्यपाल

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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समाज में जातिवाद, ऊंच-नीच जैसी कुरीतियां नहीं होनी चाहिए। व्यक्ति का आकलन उसके कर्मों के आधार पर होना चाहिए। विभिन्न धर्मों का रास्ता सिर्फ ईश्वर से जुड़ता है। इसलिए, धर्म और संस्कारों का जीवन में बेहद महत्व है। ये बातें राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने ‘वैैश्विक ज्ञानोदय द्वारा स्वर्णिम युग’ कार्यक्रम में कहीं।
रविवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने दीप जलाकर किया। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से ब्रह्माकुमारी से जुड़ी हुईं हैं, जो विश्व में भारतीय दर्शन, सभ्यता और विचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर एक आदर्श सोच के साथ चलने की जरूरत है। गीता का ज्ञान यही सिखाता है कि हमें सेवाभाव से कर्म करते रहना चाहिए। विशिष्ट अतिथि डॉ. बुद्धदेव शर्मा ने कहा कि ज्ञान वह है, जो चरित्र का निर्माण करे और आत्मा को सुख दे। ब्रह्माकुमारी मंजू ने कहा कि आत्मा सत्य है, जो शरीर का संचालन कर रही है। कहा कि मनुष्य को ईश्वर को ढूंढने के बजाय खुद को ढूंढने का प्रयास करना चाहिए। ब्रह्माकुमारी मीना और आरती ने भी ईश्वर और आत्मा के चिंतन पर विचार व्यक्त किए। मंच का संचालन सुशील ने किया।
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इंटरनेट के दुरुपयोग से बढ़ रहे दुष्कर्म के मामले
राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि युवा इंटरनेट का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध बढ़ रहे हैं। बालिकाओं को आत्मनिर्भर होने की जरूरत है। अगर बालिकाएं आत्मनिर्भर होंगी तो उनके साथ कोई गलत नहीं कर सकेगा। उन्होंने कहा कि बदलते समय में बच्चे परिजनों का आदर सम्मान करना भूल गए हैं। उन्होंने बढ़ते महिला अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए जल्द ही पुलिस विभाग के साथ बैठक कर महिला अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए ठोस निर्णय लिया जाएगा।
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