ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बुधवार को गांवों में शीतकालीन भ्रमण के दौरान ग्राम पंचायत सचिव को नदारद पाया। इस दौरान लोगों ने बताया कि उन्होंने गांव में कभी ग्राम पंचायत सचिव की शकल तक नहीं देखी है। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने ग्राम पंचायत सचिव से स्पष्टीकरण तलब किया है। वहीं, ग्रामीणों ने बताया कि एक युवक खुद को ग्राम प्रधान का सचिव बताकर पेंशन आदि के प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर तीन सौ रुपये शुल्क लेता है। इसके बाद भी लोगों के प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे हैं।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने गांवों में शीतकालीन भ्रमण कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत वह बुधवार को तहसील के कोटवाल आलमपुर गांव पहुंचीं और ग्राम पंचायत कार्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान ग्राम पंचायत सचिव नहीं मिले। उन्होंने ग्रामीणों से जानकारी ली तो पता चला कि सचिव कभी गांव आते ही नहीं। इस पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत सचिव शंकरदीप सिंह से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद ग्रामीणों ने पेंशन नहीं बनने की शिकायत की। साथ ही बताया कि खुद को ग्राम प्रधान का निजी सचिव बताने वाला एक युवक पेंशन के लिए कागजात एकत्र करता है और उनसे प्रति आवेदन तीन सौ रुपये लेता है, लेकिन उनके पेंशन आदि के प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे हैं। इस पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने युवक को बुलाकर पूछताछ तो उसने खुद को ग्राम प्रधान का निजी सचिव बताया। इस पर उन्होंने सभी आवेदनों के साथ अपने कार्यालय तलब किया है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि अधिकतर ग्रामीणों के विधवा, वृद्धावस्था और दिव्यांग आदि के प्रमाणपत्र बनने हैं। दिव्यांग पेंशन के लिए प्रमाणपत्र बनवाने के लिए सीएमएस और एडीओ ग्राम पंचायत को निर्देश दिए गए हैं।