ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
मौन पालन विभाग की ओर से अंबाड़ी पंचायत में आयोजित सात दिवसीय मौन पालन प्रशिक्षण शिविर के अंतिम दिन ग्रामीणों को मधुमक्खी पालन की वैैैज्ञानिक विधि की जानकारी दी गई। रविवार को शिविर के समापन पर प्रमाणपत्र वितरित करते हुए सहायक मधु विकास निरीक्षक राजेंद्र सिंह सजवाण ने ग्रामीणों को बताया कि मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जिसे अपनाकर ग्रामीण अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकते हैं। इसमें कम लागत और कम पूंजी लगाकर ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि मौन पालन के लिए तीन तरह की मधुमक्खी की जरूरत होती है। पहली रानी मधुमक्खी जो 24 घंटे में लगभग 800 से1500 अंडे देती है। दूसरी वर्कर (कमेरी) मधुमक्खी जो अंडे से निकले बच्चों को खाना खिलाती है। एक डब्बे में इनकी संख्या 25-30 हजार होनी चाहिए। तीसरी ड्रॉन (नर) मधुमक्खी। इससे पूर्व सात दिनों तक चले शिविर में मधुमक्खियों में होने वाली बीमारियों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान बाला चौहान, दीवान सिंह चौहान, सुभाष, शांति मौर्य, रोशनलाल मौर्य, सुनीता चौहान, चेतन चौहान, निकिता, रजत डोभाल, दीपक डबराल, अनुराधा सजवाण, विजयलक्ष्मी सजवाण, अमित आदि मौजूद रहे।