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खुद आंखों से लाचार, कर रहे दूसरों का उपचार

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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खुद आंखों से लाचार होने के बावजूद राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान में कई दिव्यांग स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग कर रहे हैं। दिव्यांग जैपनीज मैनुअल मसाज थैरेपी (जेएमएमटी) के जरिये बीमारों की मदद कर रहे हैं।
जेएमएमटी एक प्रकार की फिजियोथिरैपी या मसाज की जापानी तकनीक है। इसे एनआईईपीवीडी और जापान की सुखोई यूनिवर्सिटी ने विकसित किया है। इसमें किसी तरह की मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। संस्थान में दृष्टिबाधित दिव्यांगों को इसका प्रशिक्षण दिया जाता है। वोकेशनल ट्रेनिंग व कौशल विकास केंद्र की प्रभारी लक्ष्मी पोखरियाल ने बताया कि अभी करीब एक दर्जन छात्र-छात्राएं इसका प्रशिक्षण ले रहीं हैं। देश-विदेश में इस तकनीक को जानने वाले दृष्टि दिव्यांगजनों की खासी मांग है।
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मिल चुके हैं कई पुरस्कार
एनआईईपीवीडी की ओर से प्रत्येक वर्ष देशभर में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पांच दिव्यांगों को पुरस्कृत किया जा चुका है। अब तक जेएमएमटी के कई प्रशिक्षकों व सहायकों को यह पुरस्कार मिल चुका है। इस बार अंबरी प्रवीण को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण एवं स्थानन अधिकारी जगदीश लखेड़ा ने बताया कि अंबरी वर्तमान में उत्तरांचल ग्रामीण बैंक, हल्द्वानी में सहायक प्रबंधक पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने जेएमएमटी का कोर्स किया है।
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हर बैंक में तैनात हैं दृष्टिबाधित
एनआईईपीवीडी के प्रशिक्षण एवं स्थानन अधिकारी जगदीश लखेड़ा ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में दिव्यांगजनों के रोजगार में बढ़ोतरी हुई है। लगभग सभी बैंकों की बड़ी शाखाओं में दृष्टिबाधित अधिकारी और कर्मचारी काम कर रहे हैं।
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