एनजीटी ने शपथपत्र के साथ तलब की रिपोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राज्य में संचालित ऐसे होटल, धर्मशाला या बड़े आश्रम जो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकरण कराए बगैर मानकों के विपरीत संचालित किए जा रहे हैं, अब उन्हें पंजीकरण कराना होगा और प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन करना होगा। एनजीटी के आदेश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फिलहाल राज्य में ऐसे 3150 होटल, 718 धर्मशाला और 418 आश्रम चिन्हित कर इनकी स्टेटस रिपोर्ट भी सोमवार को एनजीटी में सौंप दी है। हालांकि स्टेटस रिपोर्ट सौंपने के बाद एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश जारी किया है कि एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ रिपोर्ट दी जाए।
उल्लेखनीय है कि देवभूमि में हजारों ऐसे होटल, धर्मशाला व आश्रम संचालित हैं जो न नदियों के किनारे बनाए गए हैं। इन होटलों, धर्मशालाओं से सीवरेज नदियों में बहाया जा रहा है। यह प्रकरण एनजीटी तक पहुंचा तो एनजीटी ने इस पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सचिव वन एवं पर्यावरण को निर्देशित किया कि राज्य में कितने होटल, धर्मशाला व आश्रम संचालित है? इनमें से कितनों का पंजीकरण किया गया है? कितने होटल, धर्मशालाओं व आश्रमों द्वारा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था की गई है? इसकी रिपोर्ट दें।
आखिरकार एनजीटी की ओर से रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सोमवार को स्टेटस रिपोर्ट सौंपी, लेकिन एनजीटी ने इसे अपर्याप्त बताते हुए शपथपत्र के साथ रिपोर्ट तलब की है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के डॉ. एसएस पाल ने बताया कि फिलहाल एनजीटी को स्टेटस रिपोर्ट सौंपी गई है। एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ रिपोर्ट सौंपी जाएगी। हालांकि डॉ. एसएस पाल का यह भी कहना है कि जिन होटलों, धर्मशालाओं व आश्रमों की सूची सौंपी गई है उसमें से कई ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकरण कराने के साथ ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगा रखा है लेकिन ज्यादातर ऐसे हैं जहां मानकों की अनदेखी हो रही है।