उत्तरकाशी। डेढ़ दशक पहले उत्तरकाशी नगर में कहर बरपाने वाले वरुणावत भूस्खलन का खतरा अभी तक पूरी तरह टला नहीं है। बुधवार को भी वरुणावत के रामलीला मैदान वाले छोर पर बड़ा बोल्डर गिरने से दहशत फैल गई। हालांकि यह बोल्डर आबादी से ऊपर जंगल में पेड़ों से टकराकर रुक गया। वरुणावत के विभिन्न हिस्सों से बार-बार पत्थर गिरने से खतरे को देखते हुए विशेषज्ञों की टीम ने बुधवार को वरुणावत का निरीक्षण किया।
बता दें कि सितंबर 2003 में करीब एक माह तक बिना बारिश के चले वरुणावत भूस्खलन ने नगर में भारी तबाही मचाई थी। इसके बाद करीब 70 करोड़ रुपये लागत से वरुणावत पर्वत का उपचार किया गया था। इसके बावजूद समय-समय पर वरुणावत के विभिन्न हिस्सों से भारी बोल्डर टूट कर गिरने से नगर में दहशत फैल जाती है। बीते माह ही इंदिरा कालोनी के ऊपरी हिस्से से टूटे भारी बोल्डर एक कच्चे भवन को ध्वस्त करते हुए गंगोत्री हाईवे तक जा पहुंचे थे। इस हादसे में तीन लोग घायल भी हुए थे। ऐसे में खतरा भांप कर प्रशासन ने वरुणावत का विस्तृत सर्वेक्षण करवाने का निर्णय लिया था। बुधवार को भी वरुणावत के रामलीला मैदान वाले छोर पर बड़ा बोल्डर टूटकर आबादी की ओर आया। स्थानीय निवासी प्रताप पोखरियाल ने बताया कि यह बोल्डर उनके द्वारा पनपाए गए जंगल में पेड़ों से टकरा कर रुक गया। इससे कुछ पेड़ तो क्षतिग्रस्त हुए, लेकिन नीचे आबादी को कोई नुकसान नहीं हुआ।
आपदा न्यूनीकरण प्रबंधन केंद्र के अधिशासी निदेशक पीयूष रौतेला के नेतृत्व में उत्तरकाशी पहुंची विशेषज्ञों की टीम ने बुधवार को वरुणावत के इंदिरा कालोनी वाले हिस्से का जायजा लिया। उन्होंने जोशियाड़ा की ओर से वरुणावत का निरीक्षण करने के साथ ही शीर्ष पर जाकर भी हालात का जायजा लिया। इस टीम में वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोग्राफी, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया एवं केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की के विशेषज्ञ शामिल थे। यह टीम अगले सोमवार तक सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेगी। इसके बाद वरुणावत से मंडरा रहे खतरे से निजात के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।