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बाणगंगा के जरिए यूपी के शुक्रताल पहुंचेगा गंगा का पानी

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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में स्थित प्रसिद्ध पौराणिक तीर्थ शुक्रताल के घाट तक जरूरत के मुताबिक गंगा का पानी पहुंचाने की कवायद तेज हो गई है। बीते 16 अगस्त को दिल्ली में हुई बैठक के बाद केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की एक टीम ने रुड़की पहुंचकर हरिद्वार आसपास और खादर क्षेत्र में गंगा, बाणगंगा, सोलानी, रतमऊ नदियों का निरीक्षण किया। टीम में शामिल सदस्यों ने इसका भी आकलन किया कि किस तरह शुक्रताल के घाट पर भरपूर मात्रा में गंगा का पानी पहुंचाया जाए।
उत्तराखंड की सीमा से करीब 40 किमी दूर स्थित पौराणिक स्थल शुक्रताल के घाट पर कभी गंगा का अच्छा खासा प्रवाह था, लेकिन करीब दस वर्षों से यह घाट पानी को तरस रहा है। बरसात के दिनों में ही यहां सोलानी और बाण गंगा पानी पहुंच पाता है। अन्य दिनों में घाट पर सूखे की स्थिति रहती है। ऐसे में शुक्रताल मंदिर के पुरोहित और हरिद्वार के संत यहां गंगा का पानी पहुंचाने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए यूपी सरकार की ओर से भी प्रयास जारी है। इस संबंध में केंद्रीय जल आयोग की ओर से सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग मेरठ के मुख्य अभियंता (गंगा) को 20 अगस्त को पत्र भेजा गया था। इसमें बताया गया है कि बीते 16 अगस्त को दिल्ली में केंद्रीय जल संसाधन नदी विकास राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा और अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की थी।
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बैठक में तय किया गया था कि केंद्रीय जल आयोग यूपी के शुक्रताल स्थित घाट पर जरूरी जल की उपलब्धता के लिए सोलानी, रतमऊ, गंगा, बाणगंगा और गंगनहर आदि का निरीक्षण कर प्री फिजिबिलिटी रिपोर्ट देगा। इसी के तहत केंद्रीय जल आयोग की टीम ने बुधवार और बृहस्पतिवार को हरिद्वार, धनौरी, रुड़की और खानपुर क्षेत्र में इन नदियों का निरीक्षण किया। इस दौरान आयोग के मुख्य अभियंता भोपाल सिंह, यूपी सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार, एई विक्रांत कुमार, एसडीओ विवेक सोनी मौजूद रहे। अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार ने बताया कि निरीक्षण के बाद टीम जल्द ही मेरठ में होने वाली बैठक में रिपोर्ट रखेगी। जिसके बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
...तो रतमऊ और सोलानी से नहीं होगी घाट की पूर्ति
सूत्रों के अनुसार, टीम का मानना है कि बरसात के दिनों में ही रतमऊ और सोलानी नदी से पानी लिया जा सकता है। अन्य दिनों में दोनों नदियों से शुक्रताल में सालभर पानी की पूर्ति संभव नहीं है। वहीं, रुड़की गंगनहर से दिल्ली में पीने के पानी सहित विभिन्न स्थानों पर सिंचाई के लिए उपयोग हो रहा है। ऐसे में रुड़की गंगनहर से भी ज्यादा पानी डायवर्ट करने की संभावना कम है। ऐसे में सुल्तानपुर के भोगपुर के समीप बिशनपुर कुंडी से गंगा का पानी बाण गंगा में छोड़कर शुक्रताल तक पानी पहुंचाने की संभावनाएं मजबूत दिख रही हैं। टीम ने सभी संभावनाओं के मद्देनजर आंकड़े एकत्र किए हैं। जल्द ही स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
सतपाल महाराज भी कर चुके हैं एलान
हाल ही में बाढ़ के मद्देनजर क्षेत्र का हवाई दौरा करने पहुंचे पर्यटन एवं सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज भी घोषणा कर कह चुके हैं कि 30 करोड़ से योजना को अंजाम दिया जाएगा। बताया गया है कि सुल्तानपुर क्षेत्र में भोगपुर के समीप बिशनपुर कुंडी में गंगा का जल बाणगंगा में छोड़ा जाएगा। इसके लिए यहां बैराज और फाटक लगाने की योजना है। इसके बाद बाण गंगा का पानी यूपी में शुक्रताल से करीब एक किमी पूर्व सोलानी नदी में संगम पर मिलेगा। यहां आज भी श्रद्धालु स्नान और आचमन करते हैं।
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शुक्रताल घाट का महत्व
मुजफ्फरनगर जिले के शुक्रताल घाट का पौराणिक महत्व है। यह घाट हिंदू संस्कृति में विशिष्ट स्थान रखने वाले उस श्रीमद्भागत पुराण से संबंध रखता है, जिसके विषय में कहा जाता है कि इसके श्रवण मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों में उल्लेख है कि शुक्रताल के घाट पर ही महामुनि शुकदेव ने पांडवों के पौत्र राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत का श्रवण कराया था। इसके बाद उन्होंने देह त्यागकर मोक्ष प्राप्त कर लिया था। तभी से यह घाट आस्था और श्रद्धा का केंद्र है।
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