ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
टपकेश्वर महादेव में बुजुर्ग, दिव्यांग और असमर्थ श्रद्धालुओं को राहत देने के लिए डेढ़ करोड़ की लागत से लिफ्ट बनाकर उस पर ताला लगा दिया गया है। 15 मीटर ऊपर आने-जाने के लिए लगी लिफ्ट महज शोपीस बनकर रह गई है। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को अब भी सीढ़ियां उतरकर मंदिर दर्शन करने जाना पड़ रहा है।
राजधानी समेत आस-पास के क्षेत्रों में टपकेश्वर मंदिर की अत्यधिक मान्यता है। इस कारण मंदिर में हमेशा श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। इसके अलावा समय-समय पर त्योहारों पर भी मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। बुजुर्ग, दिव्यांग और असमर्थ श्रद्धालुओं को राहत देने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंदिर में लिफ्ट लगाने की घोषणा की थी। बीती चार फरवरी को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एमडीडीए की ओर से एक करोड़ 55 लाख की लागत से बनी लिफ्ट का शुभारंभ किया था। कुछ समय तक तो लिफ्ट चली, लेकिन इसके बाद इस पर ताला लगा दिया गया। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को मौजूदा समय में भी सीढ़ियों से बाबा टपकेश्वर के दर्शन करने जाना पड़ रहा है।
---
क्या कहते हैं श्रद्धालु
टिहरी से पहुंची 63 वर्षीय देवेश्वरी देवी कहती हैं कि उम्र अधिक होने के कारण अब सीढ़ियां नहीं चढ़ी जातीं। यहां लिफ्ट लगी देख लगा कि सीढ़ियां नहीं चढ़नी पड़ेगी, पर मेरा अनुमान गलत था। यहां लिफ्ट में ताला लगा हुआ मिला। ऐसे में केयर टेकर के सहारे मंदिर पहुंचकर दर्शन किए।
--
प्रेमनगर निवासी 70 वर्षीय मदनलाल शर्मा बताते हैं कि वह लंबे समय से टपकेश्वर दर्शन करने आ रहे हैं। फरवरी और मार्च में तो लिफ्ट चल रही थी। एक लड़का भी मौजूद रहता था, जो बुजुर्गों और दिव्यांगों को लिफ्ट से लाता और ले जाता था। लेकिन बीते चार महीनों से इस पर ताला लटका हुआ है।
---
बाहर लिफ्ट के बाबत साइन बोर्ड छोटा है, जो दिखाई नहीं देता है। ऐसे में उन्हें नीचे पहुंचने के बाद लिफ्ट के बारे पता चलता है। जल्द ही मुख्य द्वार के पास बड़ा साइन बोर्ड लगाया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को लिफ्ट के बारे में जानकारी मिल सके। - महंत कृष्णागिरी महाराज टपकेश्वर मंदिर
--
हमने श्रद्धालुओं की सहूलियत को देखते हुए डेढ़ करोड़ की लागत से दिव्यांग, बुजुर्ग और असमर्थ लोगों के लिए लिफ्ट बनाई थी। अब इसका संचालन टपकेश्वर मंदिर की ओर से किया जा रहा है। अगर लिफ्ट बंद है तो उसे तुरंत चालू कराया जाएगा। - पीसी दुम्का, सचिव एमडीडीए