ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
पीएचडी में थीसिस चोरी करने वालों का पंजीकरण रद्द होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत पीएचडी की थीसिस चोरी के स्तर के आधार पर सजा का प्रावधान किया जाएगा।
अगर कोई प्रोफेसर थीसिस चोरी का दोषी पाया जाता है तो उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। जबकि शोधार्थी का पंजीकरण रद्द किया जाएगा। यूजीसी के माध्यम से विश्वविद्यालयों के पास ऐसे तमाम सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं जो कि आसानी से थीसिस चोरी पकड़ सकते हैं। थीसिस चोरी को तीन स्तर पर बांटा गया है। अगर किसी शोधार्थी की थीसिस में दस प्रतिशत तक चोरी पकड़ी जाती है तो इसे मामूली मानते हुए, इसमें कोई सजा नहीं दी जाएगी। दस से 40 प्रतिशत चोरी पकड़े जाने पर छह महीने के भीतर शोधार्थी को नई थीसिस जमा करानी होगी। ऐसा नहीं करने पर पीएचडी पूर्ण नहीं होगी। 40 से 60 प्रतिशत थीसिस चोरी में एक साल तक शोधार्थी के थीसिस जमा कराने पर रोक लगाई जाएगी। जबकि 60 प्रतिशत से ऊपर थीसिस चोरी पकड़े जाने पर शोधार्थी का पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा। अगर डिग्री मिल चुकी है तो दो साल तक इंक्रीमेंट नहीं मिलेगा और तीन साल तक किसी नए स्कॉलर का सुपरवाइजर बनने पर रोक लगा दी जाएगी। अगर कोई शिक्षक किसी शोध कार्य में चोरी करते हुए पकड़ा जाता है तो यूजीसी के नियमों के मुताबिक उसकी डिपार्टमेंटल एकेडमिक इंटीग्रिटि पैनल द्वारा जांच की जाएगी। इसके बाद उसे नौकरी से निकाला भी जा सकता है। दूसरी ओर, शोधार्थियों को भी थीसिस जमा कराने से पहले एक शपथ पत्र देना होगा, जिसमें यह लिखना होगा कि वह थीसिस उन्होंने खुद तैयार की है।
बयान -
यूजीसी की ओर से थीसिस चोरी के जो नियम लागू किए गए हैं, उनका पूर्णत: पालन सुनिश्चित किया जाएगा। पीएचडी थीसिस चोरी पकड़े जाने पर संबंधित के खिलाफ यूजीसी के नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. उदय सिंह रावत, कुलपति, श्रीदेव सुमन विवि व उत्तराखंड तकनीकी विवि