ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
प्रदेश में हर साल शौर्य दिवस के मौके पर स्कूली बच्चों को कारगिल के वीरों की शौर्य गाथा सुनाई जाएगी। उन्हें कारगिल युद्ध के इतिहास, शहीदों और पदक विजेताओं की जानकारी दी जाएगी। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर राजधानी के गांधी पार्क में आश्रितों एवं वीर नारियों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह घोषणा की। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश में सैनिकों और पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रत्येक जिले में एडीएम को नोडल अफसर बनाया गया है।
सीएम ने बृहस्पतिवार को कारगिल एवं अन्य युद्ध के शहीदों, पदक विजेताओं के आश्रितों को सम्मानित किया। वीर नारियों को सम्मानित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार उनके साथ हमेशा खड़ी है। सीएम ने कहा कि विधायकों ने शौर्य दिवस पर स्कूलों में छुट्टी करने की सिफारिश की है। हालांकि, वह छुट्टी के पक्ष में नहीं है। इसके बजाय वह चाहते हैं कि स्कूली बच्चों को इस ऐतिहासिक युद्ध में भारत की वीरता और हमारे योद्धाओं के साहस की कहानियां सुनाई जानी चाहिए। जल्द इसके आदेश जारी कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कोई भी सैनिक वर्दी में दिखे तो सम्मान का भाव अपने आप पैदा होता है। यही कारण है कि उन्होंने वर्दी में आने वाले सैनिकों का अपने दफ्तर में प्रवेश खुला रखा है।
इस अवसर पर विधायक गणेश जोशी ने शहीदों एवं सैनिक आश्रितों के लिए चलाई जा रही केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। अध्यक्षता करते हुए राजपुर रोड विधायक खजान दास ने सैनिक परिवारों को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। इस अवसर पर राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सैनिक कल्याण निदेशक ब्रिगेडियर सीबी चंद (सेनि), उपनल के एमडी बिग्रेडियर पीपीएस पाहवा (सेनि), सूबेदार ज्ञान सिंह बिष्ट (सेनि) समेत बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, वीर नारियां एवं आश्रित मौजूद रहे।
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दूसरी जगह होगा आयोजन
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि अगले वर्ष से शौर्य दिवस पर सरकार भव्य स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करेगी। गांधी पार्क में जगह कम होने के कारण यहां शहीद स्मारक पर केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होगा। अन्य कार्यक्रम किसी दूसरी जगह आयोजित किया जाएगा।
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सरकार ने कई योजनाएं चलाई
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में शहीदों, पदक विजेताओं, पूर्व सैनिकों, सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण की कई योजनाएं चल रही हैं। सरकार ने गैलेंट्री अवार्ड जीतने वालों की पुरस्कार राशि और पेंशन में इजाफा किया। नई पीढ़ी तक शहीदों की गौरवगाथा को पहुंचाने के लिए प्रत्येक महाविद्यालय में शौर्य दीवार बनाई गई है।
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कारगिल का हर सातवां शहीद उत्तराखंडी था
ऐतिहासिक कारगिल युद्ध में शहीद हुआ हर सातवां जांबाज उत्तराखंड की वीर भूमि से निकला था। 45 दिन के युद्ध के दौरान कुल 527 योद्धाओं ने अपने प्राण न्योछावर किए थे, जिनमें 75 उत्तराखंडी थे। इसके अलावा 1363 जांबाज घायल भी हुए। गांधी पार्क में आयोजित शौर्य दिवस कार्यक्रम में ले. ज. ओपी कौशिक (सेनि) ने कारगिल युद्ध से जुड़ी यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 12 जून से 26 जुलाई तक चले युद्ध में पहली बार भारतीय सेना ने शहीदों के शव उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की, जहां उनका सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
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सैनिकों की समस्याएं उठाईं
ब्रिगेडियर केजी बहल (सेनि) ने मुख्यमंत्री के सामने शहीदों के परिजनों और पूर्व एवं वर्तमान सैनिकों की समस्याएं रखीं। उन्होंने कहा कि जख्मी सैनिकों के लिए कोई योजना नहीं है। सीएसडी खरीद की सीमा और सामानों में कटौती की जा रही है। राज्य की सीएसडी में अन्य प्रदेशों की तुलना में 37 फीसदी अधिक एक्साइज ड्यूटी ली जा रही है।
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एक भी वादा नहीं हुआ पूरा
कारगिल युद्ध में शहीद हुए गैरसैंण निवासी रंजीत सिंह के परिवार से किया गया एक भी वादा सरकार पूरा नहीं कर पाई। उनकी पत्नी सरला बिष्ट ने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान तीन जून 1999 को रंजीत सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए। तब सरकार ने परिवार को पेट्रोल पंप आवंटित करने और स्कूल एवं सड़क का नामकरण शहीद के नाम पर करने की घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि 18 साल बीतने के बावजूद एक भी घोषणा पूरी नहीं हुई है।
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सरकार ने हर वादा किया पूरा
23 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए ग्राम कटकोड़, टिहरी निवासी सुंदर सिंह नेगी के परिजनों को सरकार से कोई शिकायत नहीं है। उनकी पत्नी दर्शनी देवी ने बताया कि सरकार ने उनके परिवार को गैस एजेंसी आवंटित की। इससे ही आज उनके परिवार का भरण-पोषण हो रहा है। कुछ समय पूर्व ही राजकीय इंटर कॉलेज फकोट, टिहरी गढ़वाल का नामकरण उनके नाम पर कारगिल शहीद सुंदर सिंह नेगी इंटर कॉलेज किया गया है।