ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने राज्य सरकार के साथ अपने असहयोग की बात दोहराई है। नाराज शिक्षकों ने व्हाट्सएप पर मिले निर्देशों को मानने और मांगी जा रही सूचना देने से भी इनकार किया है। साथ ही मांगें पूरी नहीं होने तक ऑनलाइन फीडिंग भी न करने की बात कही है।
प्राथमिक शिक्षकों का कहना है कि तीन सितंबर 2001 के बाद नियुक्त बीएड, सीपीएड, डीपीएड, बीपीएड, मृतक आश्रित व उर्दू शिक्षक के रूप में नियुक्त विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त प्राथमिक शिक्षकों को दोबारा ब्रिज कोर्स/डीएलएड के लिए बाध्य किया जा रहा है। सरकार की गलती के कारण करीब 16 वर्षों से जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रमों को मान्यता नहीं मिल पाई। अब सरकार अपनी गलती छुपाने के लिए करीब 16600 शिक्षकों को ब्रिज कोर्स/डीएलएड के लिए बाध्य कर रही है। शिक्षक संघ के जिला मंत्री प्रमोद रावत ने कहा कि इसके विरोध में शिक्षक व्हाट्स एप पर कोई भी सूचना न देने, एमडीएम के मैसेज न भेजने, प्रारंभिक शिक्षा के अलावा किसी भी नामित अधिकारी या कर्मचारी का हस्तक्षेप न मानने, आनलाइन फीडिंग न करने, मासिक परीक्षा के प्रश्न पत्र व्हाट्स एप से स्वीकार न करने और मिशन कोशिश में बाहरी हस्तक्षेप का निर्णय ले चुके हैं। मांगें पूरी न होने तक असहयोग आंदोलन जारी रहेगा।