रुड़की। उत्तराखंड परिवहन निगम में विशेष श्रेणी की यात्राओं में फिर खेल सामने आया है। बीते 12 दिन (एक अप्रैल से 12 अप्रैल 2018) में सांसदों के कोटे से निगम की बसों में 310 बार निशुल्क यात्रा की गई है। सबसे ज्यादा यात्रा ऋषिकेश डिपो की बसों में की गई, हकीकत क्या है इसका जवाब निगम के किसी अधिकारी के पास नहीं है।
एक जनवरी 2018 से 31 मार्च 2018 तक विशेष श्रेणी के अंतर्गत आने वाले (सांसदों, विधायकों, पूर्व सांसदों व पूर्व विधायकों) नौ लाख से ज्यादा यात्रियों ने साढ़े पांच करोड़ से अधिक की निशुल्क यात्रा की है। तीन माह के टिकटों में करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद निगम मुख्यालय ने 31 मार्च को प्रदेश के सभी डिपो को पत्र भेजकर इस संबंध में ब्योरा मांगा था, लेकिन जीएम के आदेश के 10 दिन तक किसी डिपो ने विशेष श्रेणी की यात्राओं का ब्योरा निगम मुख्यालय को उपलब्ध नहीं कराया गया।
10 अप्रैल को निगम मुख्यालय ने मामले को अति महत्वपूर्ण बताते हुए सभी डिपो के अधिकारियों को तीन दिन में यात्राओं का ब्योरा उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। पत्र में स्पष्ट रूप से डिपो अधिकारियों को आदेश दिए गए कि अधिकारी प्रतिदिन विशेष श्रेणी की यात्राओं का ब्योरा निगम के साफ्टवेयर से निकालकर उसकी गहनता से समीक्षा करें। ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं की संभावना न रहे, लेकिन अब एक से 12 अप्रैल तक के आठ डिपो के जो आंकड़े आ रहे हैं वह चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों के अनुसार एक से 12 अप्रैल के बीच रुड़की डिपो, ऋषिकेश डिपो, देहरादून ब डिपो, श्रीनगर डिपो, हरिद्वार डिपो, देहरादून पर्वतीय डिपो, देहरादून ग्रामीण डिपो और कोटद्वार डिपो की बसों से 310 बार सांसद कोटे से यात्राएं हुई हैं। इन यात्राओं में 23,559 रुपये का खर्च आया है।
एक अप्रैल से 12 अप्रैल तक सांसदों की यात्रा का ब्योरा
डिपो यात्री (एमपी) यात्रा खर्च
देहरादून पर्वतीय 57 7,486
ऋषिकेश 69 5,739
रुड़की 23 972
श्रीनगर 01 265
हरिद्वार 51 1826
देहरादून ग्रामीण 49 2,775
कोटद्वार 58 4,119
देहरादून ब 02 377
कोट
तारीख शायद छह या सात थी। विशेष श्रेणी के कुछ टिकटों में गड़बड़ी की जानकारी हुई। मामले में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी गई है। वहीं मामले की जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ब्रिजेश कुमार संत, एमडी परिवहन निगम