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महिला

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हरिद्वार। महिला अस्पताल की अव्यवस्थाएं और स्टाफ नर्स की लापरवाही एक गर्भवती महिला की जान पर बन आई। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की नहीं होने पर महिला को पांच किलोमीटर दूर प्राइवेट सेंटर पर जाना पड़ा। वहां से वापस अस्पताल आई तो चिकित्सक ने प्रसव के लिए लेबर रूम में भेजा और स्टाफ नर्स ने ब्लड व यूरिन जांच के लिए जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब भेज दिया। महिला ने जिला अस्पताल के शौचालय में जन्म दे दिया। गनीमत यह रही कि इस दौरान जच्चा बच्चा के साथ कोई अनहोनी नहीं हुई। मामला जिलाधिकारी तक पहुंचने पर उन्होंने सीएमएस का जवाब तलब किया है।
शुक्रवार की सुबह करीब नौ बजे गुरुकुल कांगड़ी की आशा पत्नी तेजपाल को दर्द होने पर आशा कार्यकत्री सुदेश के साथ प्रसव कराने के लिए महिला अस्पताल पहुंची। आशा कार्यकत्री ने महिला को ओपीडी में चिकित्सक को दिखाया। चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। अस्पताल में कई दिनों से अल्ट्रासाउंड नहीं होने पर आशा कार्यकत्री महिला को लेकर करीब पांच किलोमीटर दूर रानीपुर मोड़ स्थित एक प्राइवेट सेंटर पर ले गई। यहां जब महिला का नंबर आया तो केंद्र के चिकित्सक ने सलाह की दी कि महिला का प्रसव होने वाला है इसे अस्पताल ले जाएं। आशा कार्यकत्री उसे लेकर महिला अस्पताल पहुंची और सीएमएस भवानी पाल को इसकी जानकारी दी। सीएमएस ने प्रसव कराने के लिए महिला को लेबर रूम में भेज दिया। लेबर रूम में तैनात स्टाफ नर्स अंकुर चौहान ने महिला का बीपी चेक किया और ब्लड, एलएफटी, केएफटी, शुगर, यूरिन की जांच के लिए जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब जाने को कहा। आशा कार्यकत्री महिला को लेकर जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब ले गई। यहां पहुंचते ही महिला का दर्द बढ़ गया। दीर्घ शंका की शिकायत पर आशा कार्यकत्री उसे शौचालय में ले गई। महिला ने शौचालय में ही बच्चे को जन्म दे दिया। जिला अस्पताल के स्टाफ ने जब इसकी सूचना सीएमएस को दी तो इस दौरान दोनों के बीच विवाद हो गया। काफी देर बाद महिला अस्पताल की स्टाफ नर्स और आया वाहन लेकर वहां पहुंची। वह जज्जा और बच्चा को लेकर महिला अस्पताल पहुंचे। जहां दोनों को भर्ती कराया गया। शाम को इसकी शिकायत किसी ने जिलाधिकारी दीपक रावत से की। उन्होंने शाम को ही अस्पताल पहुंचकर परिजनों और आशा कार्यकत्री से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। महिला अस्पताल की लापरवाही मानते हुए उन्होंने सीएमएस भवानी पाल का जवाब तलब किया। उन्होंने कहा कि इसके लिए जो भी जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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वार्ड में ही लिया जाता है सैंपल
आमतौर से प्रदेश के अधिकांश महिला अस्पताल में यह व्यवस्था कि किसी भी तरह की जांच के लिए सैंपल लेने के लिए लैब का कर्मचारी वार्ड में जाता है। जांच के बाद इसकी रिपोर्ट वहीं भेजी जाती है। हरिद्वार के महिला अस्पताल में ऐसी व्यवस्था नहीं। यहां भर्ती गर्भवती महिलाओं को खुद ही लैब तक जाना होता है। शुक्रवार को भी इसी व्यवस्था के चलते एक गर्भवती महिला को दिक्कतें उठानी पड़ी।
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अस्पताल में लैब होने के बाद भी सभी जांच नहीं होती
महिला अस्पताल परिसर में पैथोलॉजी लैब है, लेकिन यहां एलएफटी और केएफटी की जांच नहीं होती। गर्भवती महिला को इन दोनों की जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसी लैब का क्या फायदा जिसमें सभी तरह की जांच नहीं होती। अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भी महिलाओं को जिला अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं।
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गर्भवती महिला को ओपीडी में देखा और प्रसव के लिए लेबर रूम में भेजा था। हमारे अस्पताल में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं कि गर्भवती महिलाओं का सैंपल लेने लैब का कर्मचारी आए। महिला की स्थिति को देखते हुए स्टाफ नर्स को उसे जिला अस्पताल नहीं भेजना चाहिए था। नर्स से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
- डा. भवानी पाल, सीएमएस, महिला अस्पताल

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