ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
शिक्षा विभाग में अमान्य प्रमाण-पत्रों से भर्ती शिक्षकों की जांच कर रही एसआईटी ने दो और शिक्षकाें के प्रमाण-पत्रों को अमान्य माना है। इनमें से एक शिक्षक का निवास प्रमाण-पत्र फर्जी है, जबकि दूसरे ने तथ्य छिपाकर अनुसूचित जाति के कोटे से सहायक अध्यापक की नौकरी हासिल कर ली। मामले में आरोपी शिक्षकों के अलावा शिक्षा विभाग के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई को लिखा गया है। वहीं, एसआईटी अब तक 19 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर चुकी है।
एसआईटी की जांच हरिद्वार के करीब 20 शिक्षकाें के जाति और निवास प्रमाण-पत्रों में उलझी है। एसआईटी प्रभारी श्वेता चौबे ने डीएम हरिद्वार से प्रमाण-पत्रों की जांच को समिति गठित करने को कहा था। समिति इन प्रमाण-पत्रों की जांच में जुटी है। मूल निवास प्रमाण-पत्र में खेल को लेकर प्राथमिक विद्यालय अकबरपुर, हरिद्वार के अध्यापक राहुल कुमार यादव फंस गए। सरकारी रिकॉर्ड में मूल निवास क्रमांक पर किसी दूसरे का नाम दर्ज है। यादव चार साल से ड्यूटी से अनुपस्थिति हैं। एसआईटी ने इसी आधार पर शिक्षक के खिलाफ केस दर्ज कराने की संस्तुति महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा से की है। दूसरा मामला ऊधमसिंह नगर के सितारगंज का है।
एसआईटी प्रभारी श्वेता चौबे ने बताया कि तिलयापुर राजकीय प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक माखन मंडल ने 1996 में भर्ती के समय अनुसूचित जाति का प्रमाण-पत्र लगाया था। 1973 में नमो शूद्र जाति को अनुसूचित जाति में शामिल किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने 1989 में जारी शासनादेश में बदलाव करते हुए कहा था कि इस जाति के लोग छात्रवृत्ति में इस प्रमाण-पत्र का प्रयोग कर सकते हैं, लेकिन नौकरी में यह जाति-प्रमाण पत्र मान्य नहीं होगा। इसी आधार पर एसआईटी ने सहायक अध्यापक के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है।