लगभग 14 साल की दो किशोरियों से दुष्कर्म कर गर्भवती करने के अलग-अलग मामलों में जिला अदालत ने मंगलवार को दो दोषियों को 20-20 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। एक घटना में अदालत ने पीड़िता को तीन लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है।
एक मामले में अपर जिला एवं सेशन जज रजनी शुक्ला ने शकील मोहम्मद को पोक्सो के तहत दंडित किया। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता किशोर कुमार ने बताया कि शकील पर अगस्त 2022 में कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। शकील पीड़िता के सहपाठी का भाई था। स्कूल आते-जाते जान पहचान हुई थी। आरोप है कि पहली बार सहस्रधारा स्थित एक होटल में ले जाकर जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए और डराया-धमकाया। पीड़िता ने अगस्त 2022 में शिशु को जन्म दिया, तब उसकी उम्र महज 16 साल थी। आरोपी ने सहमति से संबंध बनाने की दलील दी लेकिन अदालत ने माना कि नाबालिग अपना अच्छा-बुरा समझने में सक्षम नहीं होती। मामले में जनवरी 2023 में आरोप तय हुए थे।
Iआरोपी तीन बच्चों का पिता, जंगल में किया दुष्कर्म
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दूसरे मामले में विशेष न्यायाधीश अर्चना सागर ने सोनल पाल उर्फ सोनू को पोक्सो के तहत 20 साल कठोर कैद की सजा सुनाई। आरोप है कि वह किशोरी को जंगल में घसीटकर ले गया और दुष्कर्म किया। आरोपी तीन बच्चों का पिता है। मामला जून 2024 में बसंत विहार थाने में दर्ज हुआ था, जिसमें पुलिस ने महज दो माह के भीतर जांच पूरी करके आरोपपत्र दाखिल कर दिया था। राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक अल्पना थापा ने बताया कि शिकायतकर्ता मां को अपनी बेटी के साथ दुष्कर्म के बारे तब पता चला, जब वह छह माह की गर्भवती हो गई। उसके पेट में दर्द हुआ था, अस्पताल ले जाने पर सच सामने आया। उनकी बेटी ने बताया कि आरोपी दिसंबर 2023 की शाम उसे जंगल में घसीटकर ले गया था और दुष्कर्म किया था। दूसरी ओर बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी का किशोरी से एक साल से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। बाद में पीड़िता ने अदालत में बयान दिया था कि आरोपी उसे आते-जाते घूरता था। एक दिन उसे अपने घर पर बुलाया और डराकर दुष्कर्म किया। उसके बाद जब वह अकेला होता तो उसे अपने घर बुलाकर शोषण करता। एक दफा जंगल में भी उसका शोषण किया।
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Iऐसी घटनाएं बच्चों का विकास बाधिक करती हैं : अदालत
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विशेष न्यायाधीश सागर ने टिप्पणी की कि बालिकाओं के साथ छेड़खानी व दुष्कर्म की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। ऐसे कृत्य बालक या बालिका के शारीरिक, मानसिक, स्वास्थ्य, शिक्षा, आध्यात्मिक, नैतिक, सामाजिक व भावनात्मक विकास के लिए हानिप्रद है। न्यायालय ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और पीड़िता की गवाही के आधार पर यह माना कि अभियुक्त ही उस नवजात शिशु का जैविक पिता था और उसने नाबालिग के साथ गलत काम किया था। पीड़िता को तीन लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया।