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धर्मशास्त्र देता है सभी को जोड़ने की प्रेरणा : आचार्य

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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भारत भूमि दिव्य है, भगवान ने स्वयं भारत की पावन भूमि पर कई बार अवतार लिया। यहां धर्मशास्त्र सभी को जोड़ने की प्ररेणा देता है। ये बातें मंगलवार को आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने श्रीमद्भागवत कथा में कहीं।
नेहरू कॉलोनी स्थित सनातन धर्म मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण के दूसरे दिन कथावाचक आचार्य शिवप्रसाद ममगाईं ने कहा कि प्रदेश की जनता के लिए शहीदों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। हृदय से भगवान के लिए प्रेम उत्पन्न करना ही भक्ति का प्रथम मूल है। उन्होंने कहा कि वेद के बताए मार्ग पर चलना ही धर्म है। आचार्य ममगाईं ने कहा कि भगवान का श्रवण करने से पितरों को शांति मिलती है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से ही मनुष्य को क्रोध, लोभ, मोह आदि से मुक्ति मिलती है। मनुष्य के अंदर जब तक त्याग, करुणा आदि नहीं होगा तब तक वह परमात्मा की प्राप्ति नहीं कर सकता। व्यक्ति को उसके कर्मों का फल जीवन में एक बार अवश्य मिलता है।
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साल 1994 में प्रदेश के लिए शहीद हुए राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि देने के लिए बाल विकास शिक्षा समिति, बेटी अधिकार मिशन देवभूमि सिविल सोसाइटी, उत्तराखंड न्याय मंच और संक्रांति सोसाइटी की ओर से एक सप्ताह की श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर सोसाइटी के अध्यक्ष चंद्रशेखर भट्ट, सुदर्शन शर्मा, उत्तम सिंह पुरषोडा, भवन सिंह, जेपवी बड़ोनी, भंवर सिंह बंगारी, चंद्र प्रकाश शर्मा, डॉ. राकेश सेमवाल, पंकज सेमवाल, जगदीश पंत आदि मौजूद रहे।
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