संस्कृत के लिए समर्पित रहा डॉ. मैठाणी का जीवन : धन सिंह
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
पूर्व संस्कृत शिक्षा निदेशक डॉ. वाचस्पति मैठाणी की जयंती पर मंगलवार को परेड ग्राउंड स्थित प्रेस क्लब में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। डॉ. वाचस्पति मैठाणी स्मृति मंच और उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की ओर से संगोष्ठी के दौरान संस्कृत में डॉ. मैठाणी के योगदान पर चर्चा की गई।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि डॉ. मैठाणी का जीवन संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने अंतिम सांस तक संस्कृत भाषा के लिए काम किया। संस्कृत भाषा को दूसरी राजभाषा का दर्जा दिलाने का श्रेय भी डॉ. मैठानी को ही है। विशिष्ट अतिथि पूर्व काबीना मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि डॉ. मैठाणी ने प्राथमिक संस्कृत विद्यालय, बालिका संस्कृत महाविद्यालय, बाल गंगा महाविद्यालय, माध्यमिक विद्यालय आदि खोलकर संस्कृत भाषा की सेवा की। उन्होंने डॉ. मैठाणी के जन्मदिवस के मौके पर इस तरह के कार्यक्रम के आयोजन पर जोर दिया, ताकि लोग संस्कृत भाषा के प्रति प्रेरणा ले सकें। पंजाब आयुर्वेद के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक डॉ. मायाराम उनियाल ने संस्कृत के ग्रंथों में आयुर्वेद पर शोध की जरूरत समझायी। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के सभी विद्यार्थियों को डॉ. मैठाणी की लिखी पुस्तकें और कालिदास के ग्रंथों को पढ़ाना चाहिए। इस मौके पर डॉ. प्रेमचंद शास्त्री, श्रीकृष्ण सेमवाल, डॉ. भगवती प्रसाद मैठाणी, भीमलाल आर्य, गिरधर सिंह भाकुनी, चंद्र सिंह, मनोज द्विवेदी, हरीश गुरुरानी, पेटवाल, कैलाश मैठाणी, कविता मैठाणी, धीरज नवानी, अश्वनी कुमार, कमला मैठाणी समेत संस्कृत विद्यालय के शिक्षकों और छात्रों ने भी अपने विचार रखे।
सभी कॉलेजों में अनिवार्य होगी संस्कृत
मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि जल्द ही सभी कॉलेजों में संस्कृत भाषा को अनिवार्य किया जाएगा। संस्कृत भाषा के प्रसार से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसके अलावा मंत्री रावत ने तीन लाख रुपये की सालाना आय से कम परिवार के 50 मेधावी छात्रों को निशुल्क आईएएस की कोचिंग देने की घोषणा की। मेधावियों को कोचिंग के लिए पूर्व आईएएस अफसरों की एक कमेटी बनाई गई है। वहीं संस्कृत में पीएचडी करने वाले शोधार्थी छात्रों को सरकार की ओर से मुफ्त में पीएचडी कराई जाएगी।