कथा में बताया पर्यावरण का महत्व
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। बांदल घाटी स्थित अमर उजालेश्वर महादेव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और रासलीलाओं का वर्णन किया गया। बाल व्यास अनुज उनियाल ने श्रद्धालुओं से पर्यावरण का महत्व बताते हुए इसके संरक्षण की अपील की। शनिवार को भगवान श्रीकृष्ण और रुकमणि के विवाह का वृत्तांत सुनाया जाएगा।
श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन का शुभारंभ आचार्य अनिल कोठारी ने गणपति की पूजा-अर्चना और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर किया। दोपहर एक बजे बाल व्यास अनुज उनियाल ने गढ़वाली भाषा में भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और गोपियों के साथ की गई रासलीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि बाल श्रीकृष्ण किस तरह अपने दोस्तों के साथ मिलकर माखन चोरी कर खाया करते थे लेकिन कोई गोकुलवासी इसका बुरा नहीं मानता था। पकड़े जाने पर तो गांववासी स्वयं ही कान्हा को माखन खिलाते थे, इसे वे अपना सौभाग्य समझते थे।
इस दौरान कथा सुनने सीतापुर, सरखेत, धन्तुसेरा, शेरकी और कुमाल्डा गांव से काफी श्रद्धालु पहुंचे। कथावाचक ने सभी से पर्यावरण का महत्व बताते हुए इसके संरक्षण की अपील की। उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह यज्ञ किया जाएगा। उसके बाद भगवान श्रीकृष्ण और रुकमणि के विवाह का वृत्तांत सुनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 29 जुलाई को श्रीमद्भागवत कथा का समापन सुबह हवन कीर्तन और दोपहर में भंडारे से होगा। कथा के अंत में प्रसाद वितरण करते समय आचार्य अनिल कोठारी ने श्रद्धालुओं से कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने वालों को मोक्ष प्राप्त होता है।
इस दौरान ग्राम प्रधान सरखेत आरती पंवार, ग्राम प्रधान सीतापुर नमनी देवी, पूर्व प्रधान बीजेेंद्र पंवार, जुप्पल सिंह रावत, बख्तावर सिंह रावत, प्रताप सिंह रावत, कुंवर सिंह रावत, विकास रावत, मनजीत पंवार, रमेश राणा, केशव रावत, राजेंद्र रावत, सुनील रावत, हुक्कम सिंह मनवाल, प्रेमसिंह कोटवाल, बच्चन सिंह, मंगल सिंह आदि मौजूद रहे।