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डॉ. मुखर्जी का राजनीतिक जीवन सभी के लिए अनुकरणीय

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि बलिदान दिवस के रूप में मनाई। इस मौके पर सभी विधानसभा क्षेत्रों में कार्यक्रमों का आयोजन कर देश हित में डॉ. मुखर्जी के योगदान पर चर्चा की गई।
कैंट विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 53 में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि पंजाब और बंगाल हिन्दुस्तान का हिस्सा है तो इसका श्रेय मुखर्जी को जाता है। प्रदेश की सरकार भी उसी मार्ग का अनुसरण करते हुए जनता के दिलों में स्थान बना रही है। इस मौके पर महानगर अध्यक्ष विनय गोयल ने दून के 636 बूथों पर बलिदान दिवस मनाने की जानकारी दी। इसके अलावा रविवार को बूथों पर पीएम की ‘मन की बात’ सुनने के कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही। इस मौके पर डॉ. उदय सिंह पुंडीर, अमर ग्रोवर, मिश्रा, श्याम पंत, संजय सिंघल, शेर सिंह राणा, जोगेंद्र मल्होत्रा मौजूद रहे। भाजपा मंडल कार्यालय इंदिरानगर मेें शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में विधायक हरबंस ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान और आंदोलनों पर चर्चा की। विधायक ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने ‘दो विधान, दो निशान और दो प्रधान’ के खिलाफ आंदोलन में अपना सबकुछ बलिदान कर दिया। उन्होंने कहा कि कश्मीर समेत कई मुद्दों पर नेहरू और कांग्रेस की नीतियों के चलते डॉ. मुखर्जी ने सरकार का साथ छोड़ा था। इस दौरान उन्होंने डॉ. मुखर्जी के नाम पर शहर के प्रमुख स्थानों पर बोर्ड लगाने के लिए प्रयास की बात कही और ओल्ड मसूरी रोड स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क की सराहना की। भाजपा मंडल अध्यक्ष हरीश कोहली ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी डॉ. मुखर्जी के कार्यों को अपनी योजनाओं में नहीं जोड़ा। इस अवसर रमेश काला, पीएल सेठ, कुलदीप कुमार, के. रामबाबू, मीरा कठैत समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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वहीं भारतीय जनता पार्टी अंबेडकर नगर मंडल के कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम आयोजित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर राजपुर विधायक खजान दास ने कहा कि कार्यकर्ताओं से डॉ. मुखर्जी के आदर्शों से प्ररेणा लेने का आह्वान किया। डीडी हाट क्षेत्र के विधायक बिशन सिंह ने आजादी और धर्म के आधार पर देश विभाजन में डॉ. मुखर्जी के आंदोलन की चर्चा की। महानगर अध्यक्ष विनय गोयल ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी 33 वर्ष की उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बनने वाले सबसे कम उम्र के कुलपति थे। मंडल अध्यक्ष विशाल गुप्ता ने डॉ. मुखर्जी के राजनीतिक जीवन से सभी को प्रेरणा लेने की बात कही। इस मौके पर सुनील उनियाल गामा, संतोष नागपाल, पुष्कर काला, दिनेश समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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