ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
राज्य को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की मान्यता को लेकर सरकार सीधे तौर पर क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) के समर्थन में खड़ी हो गई है। खेल मंत्री अरविंद पांडेय ने इस मामले में क्रिकेट प्रशासक समिति के अध्यक्ष विनोद राय को सिफारिशी चिट्ठी लिखी है। इसमें सीएयू को प्रदेश की सबसे पुरानी क्रिकेट एसोसिएशन बताया गया है। साथ ही मान्यता मिलने की दशा में सीएयू को दून और हल्द्वानी के क्रिकेट स्टेडियम उपलब्ध कराने के अलावा अन्य उचित सुविधाएं देने का भरोसा भी दिया गया है।
प्रदेश में बीसीसीआई मान्यता के लिए चल रही क्रिकेट एसोसिएशनों की लड़ाई को सुलझाने में नाकाम रही सरकार अब खुद पार्टी बन गई है। सरकार सीधे तौर पर सीएयू और उसमें मर्ज हो चुकी यूनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन के साथ खड़ी हो गई है। रविवार को सीएयू पदाधिकारियों ने हरिद्वार रोड स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह जानकारी दी। अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट और सचिव पीसी वर्मा ने कहा कि सरकार के पत्र के बाद मान्यता को लेकर उनका दावा मजबूत हुआ है। उन्होंने इस प्रयास के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत और खेल मंत्री अरविंद पांडेय का आभार जताया। पत्रकार वार्ता में एएस मेंगवाल, रोहित चौहान, जोत सिंह गुनसोला, संजय गुसांई, डीके मिश्रा, संदीप गुप्ता समेत अन्य मौजूद रहे।
--
खेल मंत्री की चिट्ठी में क्या लिखा?
खेल मंत्री अरविंद पांडेय ने अपनी चिट्ठी में विनोद राय को जो लिखा, उसका हूबहू हिंदी अनुवाद कुछ इस तरह है। ‘उत्तराखंड के लिए मान्यता समिति के सदस्य नियुक्त करने के लिए आपका धन्यवाद। उत्तराखंड सरकार के पास दो अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट स्टेडियम हैं। राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम देहरादून और इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कांप्लेक्स हल्द्वानी को सरकार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों के लिए देने को तैयार है। प्रस्तावित राजधानी देहरादून में स्टेडियम है जो क्रिकेट मैच के लिए आदर्श जगह है। यह शहर और एयरपोर्ट के नजदीक भी है। मान्यता के लिए दावा कर रही चार में से एक एसोसिएशन यूनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन को प्रदेश की सबसे पुरानी क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड में मर्ज किया गया है। यूपीसीए ने भी प्रमाण पत्र दिया है, जिसमें सीएयू को प्रदेश की सबसे पुरानी और क्रिकेट के विकास के लिए काम करने वाली एसोसिएशन बताया गया है। हम दोनों स्टेडियम और बीसीसीआई के आवश्यकतानुसार अन्य सभी सुविधाएं सीएयू को देंगे ताकि सीएयू को अगले सीजन में रणजी ट्रॉफी समेत बीसीसीआई की अन्य सभी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की अनुमति मिल सके।
--
कितना असर डालेगी चिट्ठी
मंत्री की ओर से बीसीसीआई प्रशासकों की समिति को भेजी गई चिट्ठी कितनी प्रभावी होगी, इसको लेकर कुछ भी कहना अभी जल्दबाजी होगी। जानकारों की मानें तो राज्यों के स्तर से लिखी गई ऐसी सिफारिशी चिट्ठियों को बीसीसीआई बहुत ज्यादा भाव नहीं देती है। हालांकि, अभी हालात बदले हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट बीसीसीआई पर मान्यता के मसलों को हल करने के लिए दबाव बना रहा है। यही वजह है कि बीती 29 जनवरी को उत्तराखंड से संबंधित रिपोर्ट कोर्ट में जमा की थी। ऐसे में दबाव में ही सही समिति इस चिट्ठी से फैसले पर असर पड़ सकता है।
--
खेल मंत्री का यह व्यक्तिगत फैसला है या मुख्यमंत्री से पूछकर यह फैसला लिया गया है। इस मामले में हम जल्द सीएम साहब से मिलकर उन्हें सारी सच्चाई से अवगत कराएंगे। इस बारे में हमने सीओए विनोद राय को क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड का कच्चा चिट्ठा प्रमाण सहित भेज दिया गया है। इसमें खिलाड़ियों को धमकाने के अलावा सोसाइटी एक्ट के दुरुपयोग का भी जिक्र है। जहां तक खेल मंत्री के पत्र की बात है तो यह उनका भेदभाव पूर्ण रवैया है।
-चंद्रकांत आर्य, सचिव उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन
--
खेल मंत्री को यह फैसला लेना ही था तो इतने दिन क्यों लगाए। जब सीएम साहब ने 16 अक्तूबर को मान्यता के सिलसिले में बैठक बुलाई थी तो उस दिन मान्यता और एकजुटता पर बात क्यों नहीं की गई। बैठक के एजेंडे को खेल मंत्री भूलकर क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के पक्ष में अवैध तरीके से देहरादून में यूपी और महाराष्ट्र के बीच रणजी मैच कराने के लिए अड़ गए थे। सुप्रीम कोर्ट के मामला सीओए के हवाले करने के बाद इन्होंने गलत तरीके से मान्यता को लेकर बैठक बुलाई। यही वजह है कि हम उस बैठक में नहीं गए। जहां तक यूनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन (यूसीए) की बात है तो 26 जनवरी 2015 को उसके तत्कालीन अध्यक्ष और वर्तमान में प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने हमारी उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के साथ विलय किया था। अब इस पर यूसीए अपनी स्थिति स्पष्ट करे।
-दिव्य नौटियाल, सचिव, उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन