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आरटीआई कार्यकर्ता बोले सूचना मांगने पर हो रहे मुकदमे आर

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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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सूचना आयोग की ओर से वन विभाग के मंथन सभागार में सूचना का अधिकार (आरटीआई) के क्रियान्वयन में उभरती चुनौतियों पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें आरटीआई कार्यकर्ताओं ने कहा कि अब सूचना लेना आसान नहीं है। विभागीय अधिकारी सूचनाओं के लिए उन्हें एक-दूसरे कार्यालयों के चक्कर कटवाते हैं। कुछ लोग रंजिश रखने लगे हैं और उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। कार्यक्रम में किसी बात को लेकर दो पक्षों में कहासुनी भी हो गई। जिसे अफसरों ने शांत कराया।
बुधवार को वन विभाग के राजपुर रोड स्थित मंथन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में हरिद्वार से आए आरटीआई कार्यकर्ता सत्य प्रेम ने कहा कि ऊर्जा निगम से सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगी, लेकिन सूचना तो नहीं मिली पर उनके खिलाफ बिजली चोरी का केस दर्ज करा दिया गया।
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आरटीआई कार्यकर्ता विनय शुक्ला ने कहा कि क्षेत्र में शौचालय निर्माण से संबंधी सूचना मांगे जाने पर उनके खिलाफ एससी, एसटी और पैसा मांगने का मुकदमा दर्ज कराया गया। हरिद्वार के योगेंद्र सैनी ने कहा कि उन्होंने नगर निगम और शिक्षा विभाग से संबंधित सूचनाएं मांगी, लेकिन उन्हें जब समय पर सूचना नहीं मिली तो उन्होंने अपील की, अपील की सुनवाई के लिए उन्हें रविवार के दिन बुलाया गया। आरटीआई कार्यकर्ताओं ने कहा कि सूचना के लिए उन्हें विभागीय अधिकारी एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर कटा रहे हैं। उन्हें गलत सूचनाएं दी जा रही हैं जो उनके साथ नहीं बल्कि आयोग के साथ धोखा है। कार्यक्रम में मुख्य सूचना आयुक्त शत्रुघन सिंह, सूचना आयुक्त राजेंद्र कोठियाल, सूचना आयुक्त एसएस रावत, एडीजी अशोक कुमार, पूर्व सूचना आयुक्त विनोद नौटियाल, प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी, आरटीआई क्लब के अध्यक्ष बीपी मैठाणी आदि मौजूद रहे।
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.... जब मुख्य सूचना आयुक्त ने टोका
आरटीआई कार्यकर्ता दिनेश पेटवाल ने आरोप लगाया कि विभागीय कार्यालय में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है और भ्रष्ट अधिकारी आरटीआई कार्यकर्ताओं से नाराजगी रखते हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार के मामले में देश को अव्वल बताया तो मुख्य सूचना आयुक्त शत्रुघन सिंह को उन्हें टोकना पड़ा।
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सरकारी महकमे को भ्रष्ट कहना है आसान
मुख्य सूचना आयुक्त शत्रुघन सिंह ने कहा कि अधिकारियों और सरकारी महकमे को भ्रष्ट कहना आसान है। उन्होंने कहा कि आरटीआई कार्यकर्ता जिस प्रकरण की बात कर रहे हैं, उसे वे खुद देखेंगे। यदि किसी ने गलत सूचना दी है तो संबंधित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
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70 फीसदी मामले 120 दिन के भीतर हुए निस्तारित
मुख्य सूचना आयुक्त शत्रुघन सिंह ने कहा कि 70 फीसदी मामले 120 दिन में निस्तारित हुए। जबकि 85 फीसदी प्रकरण 180 दिन के भीतर निस्तारित किए गए। कुछ ऐसे मामले होते हैं जो स्पष्ट न होने से उलझ जाते हैं।
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