ब्यूरो /अमर उजाला, देहरादून।
बालिका एवं शिशु निकेतन में तीनों दिव्यांग केयर टेकरों से काम नहीं लिया जाएगा। तीनों दिव्यांग केयर टेकरों से उनका काम छीन लिया गया है। इनके स्थान पर जल्द नया स्टाफ नियुक्त किया जाएगा। जिसे लेकर शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही तैनाती की जाएगी।
बालिका एवं शिशु निकेतन से बीते 16 दिसंबर की रात पांच बालिकाएं भाग गई थीं। सूचना पर उन्हें टीएचडीसी कॉलोनी के पास से पकड़ लिया गया था। इसके बाद बाल आयोग की टीम के साथ ही जिलाधिकारी और एसएसपी ने बालिका निकेतन का निरीक्षण किया था। जिसमें बालिकाओं के संरक्षण के नाम पर उत्पीड़न की बात सामने आई थी। बालिकाओं ने तीनों दिव्यांग केयर टेकर सारिका, कविता और बीना के खिलाफ नाराजगी जताई थी। जिसके बाद मंगलवार को जिला प्रोबेशन अधिकारी ने तीनों दिव्यांग केयर टेकरों को उनके कार्य से हटा दिया। इसके बदले उन्हें अन्य कार्य सौंपे गए हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जो स्टाफ है, वह संविदा पर है। जिसके चलते दिक्कतें पेश आ रही है। बालिकाओं ने भी दिव्यांग केयर टेकरों के प्रति नाराजगी जताई थी। बाल संरक्षण आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र करते हुए स्टाफ बदलने का सुझाव दिया था। जिसे देखते हुए शासन को दो दर्जन से अधिक स्टाफ रखने का प्रस्ताव भेजा गया है। शासन से सहमति के बाद नए स्टाफ से काम लिया जाएगा।
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केयर टेकरों को हटाने पर बालिकाओं ने जताई खुशी
देहरादून। बाल संरक्षण आयोग की टीम ने मंगलवार को बालिका एवं शिशु निकेतन का निरीक्षण किया। टीम ने बालिकाओं से बात की। जिसमें बालिकाओं ने केयर टेकरों को उसके काम से हटाने पर खुशी जाहिर की। टीम को बताया कि तीनों केयर टेकरों का व्यवहार बहुत ही खराब था। जिसके चलते बालिकाएं यहां से जाना चाहती थीं। उनके हटने से माहौल ठीक हो गया है।
बाल संरक्षण आयोग की सदस्य शारदा त्रिपाठी ने बताया कि पिछले बार जब वह बालिका निकेतन आई थीं तो यहां तमाम खामियां मिली थीं। बालिकाओं का आरोप था कि उन्हें डराया-धमकाया जाता है। देखभाल में लापरवाही बरती जाती है। लेकिन, अब व्यवस्थाओं में सुधार हुआ है। बालिकाओं के साथ जिस केयर टेकर बीना का खराब बर्ताव था। उसे बिल्डिंग से बाहर करने की जानकारी दी गई है। वहीं, बालिकाओं का कहना है कि अब उन्हें यहां कोई परेशानी नहीं है।
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तेजी से चल रहा गार्ड रूम का कार्य
देहरादून। बालिका एवं शिशु निकेतन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गार्ड रूम बनाने का कार्य तेजी से हो रहा है। जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट के मुताबिक यह कदम सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर उठाया गया है।
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बालिका निकेतन में ही रहेंगी सुमित्रा-जांबी
पिता से नहीं हो सका संपर्क, बैठक में लिया गया निर्णय
पहले ही पिता ने बेटियों को साथ ले जाने से किया था मना
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून।
झारखंड निवासी सुमित्रा और जांबी बालिका निकेतन में ही रहेंगी। बुधवार को सीजेएम के आदेश पर दोनों बालिकाओं से मिलने बालिका निकेतन पहुंची बाल संरक्षण आयोग की टीम ने अधिकारियों के साथ बैठक की। जिसमें सुमित्रा और जांबी के पिता से संपर्क करने की कोशिश की गई। संपर्क न होने के चलते दोनों को फिलहाल बालिका निकेतन में ही रखने पर सहमति बनी।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य शारदा त्रिपाठी ने बताया कि झारखंड निवासी सुमित्रा और जांबी को बाल कल्याण समिति टिहरी से बीती पांच जुलाई को बालिका निकेतन में रखा गया था। दोनों बालिकाएं टिहरी में एक डॉक्टर के यहां कार्य कर रही थीं। दोनों ने डॉक्टर पर यौन शोषण और उत्पीड़न का आरोप लगाया था। बीती 13 जुलाई को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट टिहरी गढ़वाल ने दोनों बालिकाओं को पिता की सुपुर्दगी में देने का आदेश दिया था। 14 जुलाई को पिता दोनों बालिकाओं को ले जाने के लिए आए थे। लेकिन, बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य ने अग्रिम आदेशों तक उन्हें अपने संरक्षण में रखने के आदेश दिए। मंगलवार को बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य शारदा त्रिपाठी, सीमा डोरा आदि ने बालिका निकेतन के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान सुमित्रा और जांबी के पिता से संपर्क नहीं हो सका। जिसके चलते दोनों बालिकाओं को वहीं रखने की बात पर सहमति बनी। सीमा डोरा ने बताया कि बालिकाओं के पिता के आने या संपर्क होने के बाद ही आगे की कार्रवाई पूरी हो सकेगी।