हरिद्वार। नगर निगम क्षेत्र की 1950 के बाद की सभी चल-अचल संपत्तियाें के अभिलेख कंप्यूटराइज्ड कर आधार नंबर से लिंक कर ऑनलाइन होंगे। इससे बेनामी संपत्तियों का खुलासा हो सकेगा। इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय का आदेश नगर निगम को मिल चुका है।
संपत्तियों के अभिलेखों के डिजिटलाइजेशन से आम जनता को अपनी संपत्तियों के अभिलेखों की जानकारी के लिए नगर निगम और तहसील के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इससे शहरवासियों को यह भी पता चल जाएगा कि नगर निगम के पास कितनी चल-अचल संपत्तियां थी और कितनी खुर्द-बुर्द की जा चुकी हैं। अवैध रूप से संपत्तियों पर काबिज शहर के रसूखदारों के चेहरे का नकाब भी हट जाएगा। अभिलेखों में भूमि का रिकार्ड, संपत्तियों में नामांतरण और क्रय-विक्रय का रिकार्ड, सरकारी या गैर सरकारी संपत्तियों, कृषि एवं अकृषि भूमि का रिकार्ड, निजी व सोसायटी, अपार्टमेंट आदि आवासों के रिकार्ड सहित सभी संपत्तियों को कंप्यूटराइज्ड कर आधार नंबर से जोड़ा जाएगा। संपत्तियों को ऑनलाइन होने से नगर निगम के कामकाज में पारदर्शिता आएगी।