गोपेश्वर। चमोली जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी विभाग के पांच डॉक्टर वेतन का आहरण तो चमोली जिले से कर रहे हैं, लेकिन सेवा देहरादून और हरिद्वार में दे रहे हैं। जबकि चमोली जिला स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली झेल रहा है।
चमोली जिले के आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में चिकित्सकों के 63 पद सृजित हैं, जिसमें से 27 पद रिक्त हैं। वर्ष 2014 के अगस्त से आयुर्वेदिक चिकित्सालय में सेवाएं दे रही डा. शोभा रानी मिश्रा को निदेशालय के आदेश पर आयुर्वेद विवि देहरादून में संबद्ध किया गया है। आयुर्वेदिक अस्पताल चमोली में कार्य रही डा. सिद्धि मिश्रा को भी ऋषिकुल हरिद्वार में संबद्ध किया गया है।
पोखरी ब्लॉक के आयुर्वेदिक अस्पताल चांदनीखाल में तैनात डा. ज्योति राणा भी ऋषिकुल हरिद्वार में सेवाएं दे रही हैं। राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय तलवाड़ी में वर्ष 2015 में दे रहे डा. आभा सिंह को भी आयुर्वेदिक विवि देहरादून में संबद्ध किया गया है। बदरीनाथ के पूर्व विधायक राजेंद्र भंडारी का कहना है कि वर्ष 2014 में कांग्रेस सरकार ने चमोली जिले के आयुर्वेदिक अस्पतालों में डॉक्टर की तैनाती की, लेकिन वर्तमान सरकार ने उन डॉक्टरों को मैदानी क्षेत्रों में संबद्ध कर दिया है।
इधर, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डा. आरएस पाल का कहना है कि आयुर्वेदिक निदेशालय के निर्देश पर जिले से पांच डॉक्टर को रिलीव किया गया। हरिद्वार और देहरादून के स्वास्थ्य संस्थाओं में उन्हें संबद्ध किया गया है। जिले के दूरस्थ आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। निदेशालय से भी चिकित्सकों की तैनाती के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है।