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पुलिस से इक्कीस है जीवा-राठी का तंत्र

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
कुख्यात गैंगस्टर संजीव जीवा और सुनील राठी जेल में बैठकर मोबाइल फोन से अपना गैंग चला रहे हैं, तो हरिद्वार पुलिस आखिर मोबाइल फोन बरामद क्यों नहीं कर पाई। इसका मतलब है कि जीवा और राठी का तंत्र हरिद्वार पुलिस से मजबूत है।


जेल और पुलिस महकमे के बीच लुकाछिपी का खेल चलता आया है। जब भी कोई वारदात होती है तब खुलासा करते हुए पुलिस दावा करती है कि अपराधी जेल में बैठकर ही हर वारदात का ताना बाना बुनते हैं। जेल के अफसर कहते हैं कि पेशी पर आने जाने के दौरान अपराधी अपराध का खाका खींचते है। ताजा प्रकरण को ही ले लेते है। कुख्यात राठी से मुलाकात करने वाली सहारनपुर की महिला ने सीआईयू को राठी का मोबाइल फोन नंबर उपलब्ध कराया था, ये बात एक मई को सीआईयू को लग गई थी।
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राठी 12 मई तक जेल में ही रहा था तो भला हरिद्वार पुलिस आखिर मोबाइल फोन, सिम कार्ड क्यों बरामद नहीं कर पाई। पुलिस पर तमाम इलेक्ट्रोनिक्स संसाधन हैं, जिनके बूते वे अब तक संगीन घटनाओं का खुलासा करती है। सीआईयू के पास ये भी जानकारी है कि, जीवा ने हरिद्वार शहर के तीन बड़े चेहरों को फोन कॉल्स की थी तो फिर वो मोबाइल फोन, सिम कार्ड क्यों बरामद नहीं हो सका। अपनी नाकामी पुलिस महकमा ये कहकर छिपाता है कि छापे से पहले ही सिम कार्ड मोबाइल फोन छिपा दिए गए। एक जेल और पुलिस महकमा एक दूसरे के पाले में गेंद सरकाने में जुटा रहता है। अपराधी अपने मकसद में कामयाब होते है, सिस्टम का काम बस सांप गुजरने के बाद लकीर पीटने जैसा है।
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