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प्रदेश में 4000 कर्मचारियों ने किया कार्य बहिष्कार

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प्रदेश में 4000 कर्मचारियों ने किया कार्य बहिष्कार
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राज्य में कार्यरत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के 4000 कर्मचारियों ने सात सूत्री मांगों को लेकर बुधवार से दो दिवसीय कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के कर्मचारियोें के कार्य बहिष्कार किए जाने से केंद्र व राज्य सरकार की ओर से संचालित दर्जन भर स्वास्थ्य योजनाओं का काम ठप हो गया। साथ ही कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हुआ।
कुछ दिन पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संगठन की ओर से बुधवार से दो दिवसीय कार्य बहिष्कार करने का एलान किया गया था। इसी के तहत कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार किया। राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में कर्मचारी धरने पर बैठे। कार्य बहिष्कार से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित आयुष्मान भारत योजना, टीकाकरण, मातृत्व स्वास्थ्य, जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा योजना, बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम समेत दर्जन भर स्वास्थ्य योजनाओं का कामकाज प्रभावित रहा।
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दून में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुनील भंडारी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कार्यरत कर्मचारियों के लिए मानव संसाधन नीति का निर्धारण तत्काल किया जाए जिसके तहत कर्मचारियों को सामूहिक बीमा, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा आदि का प्रावधान किया जाए। साथ ही अन्य राज्यों की भांति कर्मचारियों को लॉयल्टी बोनस, ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाए। कर्मियों के नियमितीकरण एवं न्यूनतम वेतन के लिए कार्यवाही शुरू की जाए। यदि संगठन की मांगें नहीं मानी गई तो अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू किया जाएगा।
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धरने में अर्चना उनियाल, गीता शर्मा, ममता बहुगुणा, वेद प्रकाश रतूड़ी, अनूप चौहान, पूजन नेगी, रेनू नेगी, दिनेश पांडेय, दीपक, डॉ. पीयूष, ममता पयाल, उमेश, अभिषेक रावत आदि कर्मचारी शामिल रहे।

ये हैं कर्मचारियों की मांगें
1- कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर नीति बनाई जाए।
2- एनएचएम कर्मचारियों के लिए मानव संसाधन नीति तत्काल बनाई जाए।
3- ठेकेदारी प्रथा पर नियुक्ति करने संबंधी फैसले को तत्काल रद्द किया जाए और नियमित कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए।
4- पीपीपी मोड में संचालित अस्पतालों में तैनात एनएचएम कर्मचारियों के समायोजन की नीति बनाई जाए।
5- कर्मचारियों को अन्य राज्यों की भांति लॉयल्टी बोनस का भुगतान किया जाए।
6- कर्मचारियों के मानदेय निर्धारण में राज्य, जिला व ब्लॉक स्तर पर आनुपातिक दृष्टि से समानता लाई जाए।
7- आशा कार्यकर्ताओं को अन्य कार्यों का नियत मानदेय दिया जाए।
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