ब्यूरो/अमर उजाला, रोशनाबाद।
जिला उपभोक्ता संरक्षण फोरम के अध्यक्ष कंवर सैन और सदस्य अंजना चड्ढा व विपिन कुमार ने गलत अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देने के मामले में चिकित्सक पर 11 लाख 30 हजार रुपया जुर्माना लगाया व क्षतिपूर्ति व मुकदमा खर्च के रूप में बीस हजार रुपये शिकायतकर्ता को देने के आदेश दिए हैं।
भेल निवासी रेणू पत्नी संजय कुमार ने फोरम में एक शिकायत डा. मनोज सिंह, हरिद्वार स्कैन सेंटर आवास विकास रानीपुर मोड़ हरिद्वार के खिलाफ दर्ज कराई थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि 22 अप्रैल 2014 को उन्होंने बेटे को जन्म दिया था। जिस की रीढ़ की हड्डी के फ्यूटल फीमर में लैंथ वलावर लंबर एंड सैक्रम नामक हड्डी नहीं थी, जिसकी वजह से उनका बेटा ना बैठ सकता है, न उठ सकता है और न ही अपने शरीर के निचले हिस्से में हरकत कर सकता है। इस रोग के बारे में चिकित्सक से जानकारी करने पर पता चला था कि इस तरह की बीमारी का अल्ट्रासाउंड में जन्म से पूर्व भी पता चल जाता है, इसलिए डॉक्टर जन्म से पूर्व माता का अल्ट्रासाउंड कराने का सुझाव देते हैं। शिकायतकर्ता ने भी बच्चे के जन्म से पूर्व 14 अक्तूबर 2013 को विपक्षी डॉक्टर मनोज सिंह के स्कैन सेंटर अल्ट्रासाउंड कराया था। जिसमें चिकित्सक ने जांच के बाद सभी रिपोर्ट सही बताई थी। शिकायतकर्ता ने उसके बाद 19 दिसंबर 2013 और 3 मार्च 2014 को और जन्म से पहले 26 मार्च 2014 को विपक्षी चिकित्सक के सेंटर पर बच्चे का अल्ट्रासाउंड कराया था। शिकायतकर्ता को रिपोर्ट में सही स्थिति में बच्चे का होना बताया था। बच्चे के जन्म के बाद शिकायतकर्ता ने उसकी जांच हिमालय इंस्टीट्यूट जौली ग्रांट में 23 अप्रैल 2014 को कराई थी। जिसमें बच्चे के शरीर में वह हड्डी विकसित न होने की बात डॉक्टर ने बताई। यह भी बताया गया कि गर्भधारण करने के लगभग 3 माह के भीतर इस बीमारी का पता चल जाता है। शिकायतकर्ता ने अपने बच्चे की एम्स अस्पताल दिल्ली में भी जांच कराई। वहां भी उस हड्डी का न होना बताया गया था। शिकायत पर सुनवाई करने के बाद फोरम के अध्यक्ष कंवर सेन तथा सदस्य अंजना चड्ढा और विपिन कुमार ने पाया कि चिकित्सक ने लापरवाही एवं चिकित्सीय सेवा में कमी की है। फोरम ने विपक्षी चिकित्सक डॉ. मनोज सिंह को 8 लाख आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में तथा मानसिक और शारीरिक क्षति के रूप में साढ़े 3 लाख 50 हजार रुपये का भुगतान 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से शिकायत दर्ज करने की तिथि से अंतिम अदायगी तक देने के आदेश दिए हैं । इसके अलावा मुकदमा खर्च एवं अधिवक्ता फीस के रूप 20 हजार रुपये भी शिकायतकर्ता को अदा करने के आदेश दिए।