वन मंत्री ने यूपी के मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय वीरचंद्र सिंह गढ़वाली के परिजनों को वन विभाग की जमीन खाली कराने को लेकर डीएफओ की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद सरकार हरकत में आ गई है। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भावुक पत्र लिखकर 90 साल स्रद्ध लीज पर दी गई जमीन का शुल्क माफ करने की गुजारिश की है। साथ ही स्वतंत्रता सेनानी के परिजनों को जमीन खाली करने का नोटिस जारी करने वाले वन विभाग के अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए पत्र में वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा है कि यूपी वन विभाग के अफसरों की ओर से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय वीरचंद्र सिंह गढ़वाली के परिजनों से लीज पर दी गई जमीन का शुल्क जमा कराने और ऐसा नहीं करने पर जमीन खाली करने का नोटिस जारी किया गया है। विभागीय अफसरों के इस नोटिस के चलते पूरे राज्य की जनता के साथ वे खुद को आहत महसूस कर रहे हैं।
वन मंत्री डॉ. रावत का कहना है कि पेशावर विद्रोह के महानायक वीरचंद्र सिंह गढ़वाली ने 23 अप्रैल 1930 को अमानवीय अत्याचार के विरुद्ध विद्रोह कर दिया था। उनकी वीरता को देखते हुए महात्मा गांधी ने उन्हें गढ़वाली की उपाधि दी थी। उनकी वीरता को देखते हुए सरकार ने भी 21 जनवरी 1975 को बिजनौर जिले की साहनपुर रेंज के हल्दूखाता वन क्षेत्र में वन रक्षक चौकी के पास 10 हेक्टेयर जमीन 90 साल के लीज पर दी थी। आज उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वे लीज शुल्क देने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में डीएफओ नजीबाबाद की ओर से उन्हें 30 अगस्त को शुल्क जमा कराने का नोटिस जारी कर दिया। शुल्क जमा नहीं करने की स्थिति में जमीन खाली करने की चेतावनी दी गई है।
डॉ. रावत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया है कि वे उत्तराखंड के ही रहने वाले हैं और स्वतंत्रता सेनानी वीरचंद्र सिंह गढ़वाली के परिवार के बारे में बखूबी जानते हैं। परिवार की समस्याओं को देखते हुए लीज शुल्क माफ किया जाए। साथ ही वन विभाग के उन अफसराें के खिलाफ कार्रवाई की जाए जिन्होंने स्वतंत्रता सेनानी के परिजनों को जमीन खाली करने का नोटिस जारी करने के साथ ही देश के इस महानायक का अपमान किया है।