ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
‘प्रदेश के उद्योग बुरे दौर से गुजर रहे हैं। कहीं बिजली की किल्लत है तो कहीं पुराने एक्ट से परेशानी हो रही है। कहीं वाहनों की आवाजाही की दिक्कत है तो कहीं उद्योगपति वैट और जीएसटी के बीच उलझे हैं।’ बृहस्पतिवार को उत्तराखंड इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन (यूआईडब्ल्यूए) की ओर से आयोजित कारपोरेट मीट में प्रदेशभर से पहुंचे उद्योगपतियों ने अपनी समस्याएं गिनाई। उन्होंने एसोसिएशन के माध्यम से समस्याओं का हल निकालने की मांग की।
राजपुर रोड स्थित एक होटल में यूआईडब्ल्यूए के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष महेश शर्मा ने पिछले दो वर्षों के कार्यकाल का ब्योरा पेश किया। उन्होंने बताया कि अपने कार्यकाल में सरकार की हिल पॉलिसी, एमएसएमई पॉलिसी, केंद्रीय सब्सिडी पैकेज और विभिन्न स्तर पर उद्योगों के लिए काम किया है। इसके बाद प्रदेशभर से आए उद्योगपतियों ने अपनी समस्याएं एसोसिएशन के समक्ष रखीं। उन्होंने कहा कि दिक्कतें दूर करने के लिए एसोसिएशन को एकजुटता के साथ प्रयास करना होगा। पटेलनगर स्थित निरंजनपुर मंडी में ट्रकों की नो एंट्री को लेकर हिल्ट्रॉन कंपनी के मनोज गुप्ता ने अपनी परेशानी रखी। उन्होंने कहा कि पहले दिन में भी एंट्री मिल जाती थी, लेकिन अब केवल रात के नौ बजे से सुबह सात बजे तक ही एंट्री मिलती है। इस वजह से उनका काम प्रभावित हो रहा है। उन्होंने दिन में एक या दो घंटे के लिए एंट्री खोलने की मांग रखी।
सेलाकु ई के उद्योगपतियोें ने विद्युत आपूर्ति बाधित होने से नुकसान की समस्या रखी। इस पर नए अध्यक्ष अनिल मारवाह ने शीघ्र ही सीएम से वार्ता कर सेलाकुई में 220 केवीए का सब स्टेशन स्थापित करने की बात कही। हिल पॉलिसी पर उद्योगपतियों ने क नेक्टिविटी न होने के कारण कई दिक्कतों को पदाधिकारियों के सामने रखा। अनिल मारवाह ने कहा कि वह सरकार के साथ मिलकर उद्यमी एवं राज्य हितों के लिए रचनात्मक सहयोग के साथ-साथ अपना समर्थन देंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश को विकसित करने के लिए हमेशा राज्य सरकार के साथ हाथ से हाथ मिलाकर काम करेंगे। इस अवसर पर मयंक गर्ग, उदयवीर सिंह, अभिजीत बोस, श्यामल चटर्जी, विजय सिंह तोमर, विजय अग्रवाल, अमन मल्होत्रा, अपर्णा मित्तल समेत कई उद्योगपति मौजूद रहे।
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उद्योगपतियों ने यह प्रमुख मांगें रखी
-जल्द से जल्द सेलाकुई इंडस्ट्रियल एरिया में 220 केवीए का विद्युत स्टेशन स्थापित किया जाए।
-दून वैली नोटिफिकेशन 1989 की समीक्षा हो ताकि नए उद्योग स्थापित करने में लंबा समय न लगे।
-उत्तराखंड में भी फूड इंडस्ट्री में एफएसएसएआई परमिट के लिए ऑनलाइन शुल्क भुगतान हो।
-फूड प्रोसेसिंग यूनिट के लिए जल्द नीति निर्धारित की जाए और सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत करें।
-कालसी स्थित नलकूप विभाग की 250 बीघा बंजर जमीन उद्योग विभाग व सिडकुल को सौंपी जाए।
-लघु नमकीन उद्योगों के पक्ष को मजबूती से जीएसटी काउंसिल में रखा जाए, बेकरी उद्योग को प्रोत्साहित करें।
-प्रदेश में उद्योग मित्र के प्लेटफार्म को नियमित और ज्यादा प्रभावशाली बनाया जाए।
-क नेक्टिविटी के लिए शीघ्र ही देहरादून, हरिद्वार, रुड़की और मुजफ्फरनगर हाईवे मजबूत बनाया जाए।
-परचेजिंग पॉलिसी सख्ती से लागू हो ताकि यहां के सरकारी विभाग, प्रदेश में बने हुए उत्पाद ही खरीदें।