ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राज्य के पर्वतीय इलाकों मेें हृदय रोगों से जूझ रहे मरीजों को अब देहरादून, दिल्ली या फिर बरेली नहीं जाना पडे़गा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग कुमाऊं के हल्द्वानी और श्रीनगर में कार्डियोलाजी सेंटर खोलने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा प्राथमिक सुविधा के लिए पर्वतीय जिलों में सब सेंटर खोेलने की योजना है। इन अस्पतालोें का संचालन पीपीपी मोड में किया जाएगा। इस बाबत स्वास्थ्य निदेशालय ने शासन को प्रस्ताव भेजा है।
वर्तमान में राज्य के किसी भी सरकारी अस्पताल में कार्डियोलाजिस्ट व किडनी रोग विशेषज्ञ नहीं होने की वजह से हृदय व किडनी की बीमारियों से पीड़ित गंभीर मरीजों को भटकना पड़ता है। हालांकि देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल व अल्मोड़ा के बेस अस्पताल में पीपीपी मोड में इलाज की सुविधा है, लेकिन मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण सभी को जरूरत के वक्त इलाज नहीं मिल पाता है।
सहायक निदेशक डॉ. तुहिन कुमार ने बताया कि श्रीनगर व हल्द्वानी में दो और अस्तपालों में पीपीपी मोड में इलाज की सुविधा मुहैया कराने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। इन दो नए अस्पतालों के अलावा कई जगहों पर सब सेंटर खोलने की योजना भी है। इसके अलावा एक कार्डियोलाजी सेंटर कुमाऊं के काशीपुर में अमर उजाला फाउंडेशन के सहयोग से खोला जाएगा। जिसकी प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।
नए डायलिसिस सेंटर भी खोले जाएंगे
सहायक निदेशक डॉ. तुहिन कुमार के अनुसार कार्डियोलॉजी सेंटर के साथ ही नए डायलिसिस सेंटर भी पीपीपी मोड में संचालित करने की योजना है। वर्तमान में देहरादून के कोरोनेशन व बेस अस्पताल अल्मोड़ा में डायलिसिस की सुविधा है। डायलिसिस के एवज में मरीजों से 287 रुपये लिए जाते हैं। मरीजों को दिक्कत न हो इसके लिए अस्पतालों में चौबीस घंटे डायलिसिस होता है।