ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
मानसून की दस्तक के साथ ही प्रदेश के संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में ‘आपदाओं का मौसम’ शुरू हो गया है। इस दौरान किसी आपात स्थिति में बड़ी संख्या में एंबुलेंस की जरूरत पड़ती रहती है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण 61 नई एंबुलेंस चार महीने से स्वास्थ्य निदेशालय में खड़ी धूल फांक रही हैं। इनमें चिकित्सकीय उपकरण और दवाओं की व्यवस्था नहीं होने से जिलों में नहीं भेजा जा सका है।
दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में तत्काल चिकित्सा और पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य निदेशालय ने 61 एंबुलेंस की खरीद की। सरकार के एक साल पूरा होने पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इनको हरी झंडी भी दिखा दी, लेकिन इसके बाद ये एंबुलेंस निदेशालय में ही खड़ी हैं। चिकित्सकीय उपकरण और दवाओं की व्यवस्था (फैब्रीकेशन) नहीं होने से एंबुलेंस परिसर में खड़े-खड़े खराब हो रही हैं। फैब्रीकेशन के लिए टेंडर तो निकाला गया, लेकिन किसी को आवंटन नहीं हो पाया। अब धुमाकोट हादसे और मानसून की दस्तक के साथ ही प्राकृतिक आपदाओं की संभावनाएं बढ़ी है तो सभी जिलों में एंबुलेंस की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे में यदि समय पर इन एंबुलेंस का फैब्रीकेशन करा लिया गया होता तो लोगों के साथ विभाग को भी सहूलियत मिलती।
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एंबुलेंस के फैब्रीकेशन के लिए टेंडर निकाले गए थे, लेकिन जिन कंपनियों ने टेंडर में हिस्सा लिया उनकी दरें अधिक थीं। दोबारा टेंडर किया गया तो दरें 12 लाख से घटकर छह लाख हो गई हैं। टेंडर जारी कर दिया गया है। डेढ़ माह में सभी एंबुलेंस का फैब्रीकेशन करा जिलों को आवंटित कर दिया जाएगा। इसके अलावा 30 और नई एंबुलेंस खरीदने की स्वीकृति शासन से मिली है। उनकी भी खरीद जल्द की जाएगी।
-डॉ. टीसी पंत, महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण