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नहीं चेता जल संस्थान, वाटर वर्क्स में फिर क्लोरीन का रिसाव

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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करीब छह महीने बाद राजपुर रोड स्थित जल संस्थान के वाटर वर्क्स में रखे क्लोरीन गैस के सिलेंडर से बुधवार को फिर रिसाव हो गया। इससे आसपास रहने वाले लोगों में अफरातफरी मच गई और वे घरों से बाहर निकल गए। गैस रिसाव से संस्थान के अधिकारियों के भी हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में सिलेंडर को नहर में डाला गया, लेकिन इसके बाद भी घंटों क्लोरीन गैस का असर हवा में बना रहा। इसके चलते लोगों को सांस लेने में परेशानी हुई। मौके पर पहुंचे जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक ने मामले की जांच कर लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। वहीं, छह माह के भीतर दूसरी बार क्लोरीन गैस के रिसाव से साफ है कि 17 अगस्त 2017 को हुए रिसाव से जल संस्थान ने कोई सबक नहीं लिया है।
बुधवार सुबह करीब दस बजे जल संस्थान के वाटर वर्क्स में क्लोरीन गैस का रिसाव हो गया। देखते ही देखते पूरे इलाके में क्लोरीन की बदबू फैल गई। जल संस्थान से सटे मकानों के लोग घरों से बाहर निकल आए। उन्होंने मामले की सूचना पुलिस को दी। इसके बाद एंबुलेंस और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। उधर, जल संस्थान के कर्मचारियों में भी घटना से अफरातफरी मच गई। उन्होंने रिसाव वाले सिलेंडर को तुरंत नहर में डलवा दिया। इसके बावजूद क्लोरीन की दुर्गंध हवा में रहने से लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। अधिकतर लोग रुमाल से नाक ढके हुए थे।
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हालांकि, यह गनीमत रही कि हादसे के वक्त बच्चे स्कूल गए हुए थे। सूचना मिलते ही जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एसके गुप्ता मौके पर पहुंचे और मामले की जांच की बात कही। उनका कहना था कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि क्लोरीन गैस का प्रयोग बंद कर दिया जाएगा। पूरी तरह से सोडियम हाईपोक्लोराइड का इस्तेमाल किया जाएगा। यह पूरी तरह से लिक्विड होता है, जिससे गैस रिसाव जैसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा। जिस सिलेंडर से गैस का रिसाव हुआ है, वह काफी दिनों से वाटर वर्क्स में पड़े जंक खा रहे हैं।
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बहाने बनाते रहे अधिकारी
जल संस्थान के अधिकारी कितने गैर जिम्मेदार हैं, इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वे बुधवार को गैस रिसाव की घटना के बावजूद अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थे। जल संस्थान मुख्य महाप्रबंधक एसके गुप्ता ने कहा कि क्लोरीन गैस का प्रयोग बंद कर दिया गया है। खाली सिलेंडरों को स्टोर में रखा गया है। उन्होंने कहा कि मंगलवार को शिकायत मिली थी कि सिलेंडर से गैस रिसाव हो रहा है। इसके बाद सिलेंडर को नहर में डाला गया। सुबह जब सिलेंडर को नहर से निकाला गया तो क्लोरीन गैस का रिसाव हो गया। ऐसे में सवाल यह है कि अगर क्लोरीन का प्रयोग बंद है तो यहां सिलेंडर क्यों रखे गए हैं और इनमें क्लोरीन गैस क्यों है। हालांकि, मुख्य महाप्रबंधक का कहना है कि जल्द ही शेष 11 सिलेंडरों को केसरवाला प्लांट ले जाकर काटा जाएगा।
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खतरनाक है क्लोरीन गैस
क्लोरीन गैस दुर्गंधयुक्त खतरनाक गैस की श्रेणी में आता है। यह शरीर के लिए घातक साबित हो सकती है। ज्यादा इनहेलेशन से मौत तक हो सकती है। वहीं, आंख और स्किन पर भी इसका असर पड़ता है। क्लोरीन गैस से सुनने की क्षमता भी प्रभावित होती है।
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गैस रिसाव के दोषियों को जल संस्थान ने बचाया

पिछले वर्ष 17 अगस्त की रात क्लोरीन गैस के सिलेंडर में हुआ था विस्फोट
जल संस्थान आज तक नहीं कर पाया कार्रवाई, शासन के पाले में डाली गेंद

अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून।
17 अगस्त 2017 को जल संस्थान के वाटर वर्क्स में हुए गैस रिसाव के मामले में दोषियों को जल संस्थान ने बचा लिया है। जांच रिपोर्ट आने के छह माह बाद भी जल संस्थान की ओर से कोई एक्शन नहीं लिया गया है। अब दूसरी घटना हुई तो मुख्य महाप्रबंधक एसके गुप्ता का कहना है कि शासन से कार्रवाई के निर्देश ही नहीं मिलेे हैं। इससे जल संस्थान के आला अधिकारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उस घटना के पीड़ित भी दबी जुबान में जल संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
जल संस्थान के वाटर वर्क्स में हुए क्लोरीन रिसाव में करीब दो दर्जन लोग प्रभावित हुए थे। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मामले से शासन-प्रशासन में खलबली मच गई थी। इसके बाद कमिश्नर दिलीप जावलकर और जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया था और मामले में जांच बैठाई थी। निरीक्षण के दौरान तमाम खामियां भी मिली थीं। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को फटकार भी लगाई थी। इसके बावजूद जल संस्थान के अधिकारियों ने अपनी कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं किया। जांच की रिपोर्ट तीन सदस्यीय कमेटी को एक सप्ताह में देनी थी। रिपोर्ट दी गई, लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं हो पाई है। अब जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एसके गुप्ता मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं। उनका कहना है कि शासन से निर्देश मिलेंगे तो कार्रवाई होगी।
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कई दोषी पाए गए थे : जीएम
जल संस्थान वाटर वर्क्स में हुए क्लोरीन गैस रिसाव मामले की जांच समिति के अध्यक्ष एवं महाप्रबंधक सुदेश कुमार शर्मा का कहना है कि उन्होंने निर्देशों के तहत दस दिन के भीतर जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। इसमें कई लोग दोषी भी पा गए थे, लेकिन इसके बाद क्या कार्रवाई हुई, इसका कुछ पता नहीं है।
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सीएम ने भी दिए थे जांच के आदेश
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी पिछले वर्ष 18 अगस्त को अस्पताल में क्लोरीन गैस से पीड़ित लोगों का हाल जानने के बाद जांच के आदेश दिए थे, लेकिन इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। एक बार फिर क्लोरीन गैस रिसाव ने मामले को गरमा दिया है।
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यहां तो हर जगह ‘मौत का साया’
देहरादून (ब्यूरो)। जल संस्थान परिसर में भीतर घुसते ही हर जगह मौत का साया नजर आता है। खुले में क्लोरीन गैस के सिलेंडर जंक खा रहे हैं। बुधवार को जो हादसा होते-होत बचा, वह भी ऐसे ही खुले में पड़े गैस सिलेंडर से रिसाव की वजह से हुआ। इसके बावजूद जल संस्थान के अधिकारियों को कोई चिंता नहीं है। जबकि, यहां न केवल परिसर में काफी लोग रहते हैं, बल्कि आसपास भी रिहाइशी इलाका है। वाटर वर्क्स में वैसे तो क्लोरीन गैस सिलेंडर का होना आम है, लेकिन इन्हें रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। परिसर में गैस के सिलेंडर इधर-उधर बिखरे पड़े हैं। भीतर घुसते ही एक ओर सोडियम हाइपोक्लोराइड के बड़े टैंक रखे हैं। इसके बराबर में ही खुले में सिलेंडर पड़े हैं। थोड़ा और भीतर जाने पर गैस के सिलेंडर खुले में जंक खा रहे हैं। सवाल यह है कि जब जल संस्थान इन सिलेंडर का इस्तेमाल नहीं करता है तो परिसर में इन्हें क्यों रखा गया है?
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