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गुलदार के निशाने पर 11 गांव और नेशनल हाइवे

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गुलदार के निशाने पर 11 गांव और नेशनल हाइवे
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-- चार वर्षों में 13 लोग और दर्जनों मवेशियों को निवाला बना चुका है गुलदार
बालेंद्र सिंह नेगी
रायवाला-ऋषिकेश।
राजाजी टाईगर रिजर्व पार्क की सीमा से सटे 11 राजस्व ग्राम पंचायत और नेशनल हाईवे पर गुलदार की लगातार आमद से लोग खौफ में हैं। पिछले चार वर्षों में गुलदार के हमलों में 13 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके साथ ही दर्जन भर लोग घायल भी हो चुके हैं। गुलदार के हमले इंसान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र के दर्जनों मवेशी गुलदार का निवाला बना चुके हैं। पार्क की मोतीचूर रेंज के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग और आसपास गांव में गुलदार की आमद के लिहाज से लोगों के लिए नेशनल हाईवे डेंजर जोन बना हुआ।
दरअसल, राजाजी टाईगर रिजर्व की सीमा नेशनल हाइवे और आसपास के 11 ग्राम पंचायतों से सटी हुई है। पिछले चार सालों में 13 घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें सात मामलों में गुलदार ने हरिद्वार-ऋषिकेश नेशनल हाईवे पर लोगों को निवाला बनाया है। जबकि छह मामलों में गुलदार ने अलग-अलग गांवों के भीतर घुसकर लोगों को मारा। ग्रामसभा खांडगांव, प्रतीतनगर, गौहरीमाफी, रायवाला, साहबनगर, छिद्दरवाला, हरिपुरकलां, चकजोगीवाला, जोगीवालामाफी, खैरीकलां, खैरीखुर्द की सीमा पार्क से सटी हुई है।
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सामाजिक कार्यकर्ता राजेश भट्ट और विकास रयाल ने सरकार पर राजाजी टाईगर रिजर्व घोषित करने के दौरान मानकों में लोगों की सुरक्षा की अनदेखी का आरोप लगाया। कहा कि इसके भविष्य में और भी ज्यादा गंभीर परिणाम लोगों को भुगतने पड़ सकते हैं। कहा कि पार्क प्रशासन ग्रामीणों की सुरक्षा में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है। यही वजह है कि साल-दर-साल गुलदार के हमलों में लोगों की मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।
सुनसान हाइवे पर चले संभलकर :
हरिद्वार से देहरादून या फिर देहरादून से हरिद्वार जाने वाले लोगों के लिए सबसे खतरनाक पेच नेशनल हाइवे का है। नेपाली फार्म तिराहा से लेकर नेशनल हाइवे पर जंगल का क्षेत्र शुरू हो जाता है। जंगल का क्षेत्र रायवाला से लेकर राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के गेट तक पड़ता है। करीब डेढ़ किलोमीटर के इस पेच पर जंगली जानवरों का सबसे अधिक खतरा रहता है। सुरक्षा के लिहाज से पार्क प्रशासन की ओर से बोर्ड भी लगाए गए हैं, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से यह नाकाफी हैं। इस पेच पर रात के समय गुलदार व हाथी अकसर सड़क पार करते दिखाई देते हैं।
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बीते चार सालों में गुलदार के शिकार हुए लोग
तिथि शिकार हुए लोग स्थान
28 मार्च 2014 अनिकेत रायवाला गांव
25 अक्टूबर 2014 काशीराम रायवाला गांव
02 फरवरी 2015 दीपिका नेगी खांडगांव
29 मार्च 2015 राजकुमार नेशलन हाइवे
08 जून 2015 राजेश कुमार नेशनल हाइवे
15 जून 2015 पुष्कर सिंह नेशनल हाइवे
07 सितंबर 2015 साधू सिंह गौहरीमाफी
18 नवंबर 2015 प्रवेश जोशी हरिपूरकलां
29 दिसंबर 2015 रोहित क्षेत्री साहबनगर
18 नवंम्बर 2016 सोमपाल नेशलन हाइवे
03 मई 2017 अज्ञात नेशनल हाइवे
18 मई 2017 आनंद सिंह नेशनल हाइवे
19 दिसंबर 2017 अज्ञात नेशनल हाइवे
बोर्ड लगाने तक सीमित विभाग
नेशनल टाइगर रिजर्व पार्क क्षेत्र में लोगों को साइन बोर्ड के माध्यम से गुलदार आदि खूंखार जंगली जानवरों को लेकर जागरुक किया जा रहा है। बाहर से आने वाले अनजान लोगों को समझा पाना मुश्किल हो रहा है, जबकि गुलदार से सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोग काफी हद तक जागरुक हो रहे हैं। अनजान लोग घने जंगल में हाइवे पर वाहन रोककर जंगल में शौच आदि के लिए चले जाते हैं जिससे इस तरह की घटनाएं होती हैं। हाइवे के जंगल के बीचोंबीच होने से सुरक्षात्मक उपायों को करने में दिक्कतें आ रही हैं।
- सनातन सोनकर, निदेशक राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन।
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