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बोले एसडीएम, ऐसा चावल जनता को खिला रहे हैं हम?

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बोले एसडीएम, ऐसा चावल जनता को खिला रहे हैं हम?
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
ट्रांसपोर्टनगर स्थित राजकीय खाद्यान्न गोदाम में छापा मारने पहुंचे एसडीएम प्रत्यूष कुमार चावल की घटिया गुणवत्ता देखकर हतप्रभ रह गए। बोले, ऐसे चावल जनता को खिला रहे हैं हम? हमारी सरकार इतना बजट ऐसे चावल के लिए देती है? एसडीएम के सवालों को सुनकर वरिष्ठ विपणन अधिकारी एवं गोदाम प्रभारी कैलाश चंद्र पांडेय कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इतना जरूर बोले कि साहब, गुलरघाटी गोदाम से जो चावल आया है, वह नियम के हिसाब से आगे भेजा जा रहा है। एसडीएम प्रत्यूष कुमार और वरिष्ठ विपणन अधिकारी के बीच हुई बातचीत।
एसडीएम : ये चावल किसके लिए भेजा जा रहा है?
जवाब : यह राशन दुकानों पर भेजा जा रहा है सर।
एसडीएम : यह चावल भेजा जाता है.. क्या ऐसे चावलों की परमीशन है भेजने की?
जवाब : जी सर, यह सेकेंड रिवाइवल चावल है।
एसडीएम : कितना परसेंट टूट होती है इसमें?
जवाब : 30 प्रतिशत कर लेते हैं सर। इसे भी 30 प्रतिशत ही लिखेंगे।
एसडीएम : यह जवाब नहीं हुआ, इस चावल में कितना टूटा हुआ है?
जवाब : मैं देखकर बताता हूं सर।
एसडीएम : कौन मापता है इसकी गुणवत्ता ?
जवाब : उनका ट्रांसफर हो चुका है सर, मैं ही देखता हूं यहां।
एसडीएम : ऐसी गुणवत्ता का चावल भेजते हैं हम लोग ?
जवाब : यह सेकेंड रिवाइवल का चावल है सर। गुलरघाटी में रखा हुआ है।
एसडीएम : कहां से आया है ऐसा चावल?
जवाब : कुमाऊं मंडल से सर। यह वही चावल है, जिसे लेकर कुमाऊं में कुछ विवाद भी हुआ था।
एसडीएम : मानक क्या हैं, कितना बड़ा होना चाहिए चावल?
जवाब : सर, मानक के हिसाब से 25 प्रतिशत तक टूटा हुआ चावल होना चाहिए, हम देखकर बताते हैं।
(इसके बाद एक प्लेट में चावल निकाला जाता है।)
एसडीएम : आपके 25 परसेंट को मैं कैसे सही समझूं? मेरे हिसाब से तो यह 50 परसेंट टूटा है।
जवाब : यह जो छोटा दाना है यह चाकी है सर, इसे टूटा हुआ नहीं कहते।
एसडीएम : चाकी कितने परसेंट तक हो सकता है इन चावल में?
जवाब- सर, तीन परसेंट तक हो सकता है।
एसडीएम : यहां शुरू करें तो 50 परसेंट से ज्यादा चाकी नजर आ रहा है।
जवाब : नहीं साहब, इसमें चाकी है, रेड भी है, ब्रोकन भी है।
एसडीएम : टूटन कितनी होनी चाहिए ?
जवाब : 25 परसेंट
एसडीएम : साबुत कितना हो?
जवाब : साहब बाकी पूरा।
एसडीएम : इसकी क्वालिटी तो लग रही है कि यह बेहद टूटा हुआ है। चाकी तीन परसेंट कहां है, 70 परसेंट तो चाकी ही नजर आ रहा है।
जवाब : कोई जवाब नहीं बन पाया।
एसडीएम : यह कहां से आया है ?
जवाब : सर, जो गुलरघाटी गोदाम में लगा हुआ है, वहीं से आया है।
एसडीएम : इसकी जांच कौन करता है?
जवाब- हम ही जांच करते हैं सर, आपूर्ति विभाग वाले टेक्निकल नहीं हैं, वह अगर ले जाएंगे सैंपल तो हमारी लैब में लेकर जाएंगे।
एसडीएम : ठीक है, इसका सैंपल भरो और सील कर दो।
जवाब- जी सर।
(इसके बाद सैंपल भरने की प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन एक कर्मचारी भीतर जाकर प्लेट के चावल बदल देता है। इसकी भनक एसडीएम को लगती है तो अपने सामने अपने मातहतों के साथ वह सैंपलिंग कराते हैं। तब जाकर सैंपल भरकर भेजे जाते हैं।)
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हमें पहले भी शिकायत मिली थी तो हमने सैंपलिंग कराई थी। यह बेहद चिंता का विषय है। आज जो सैंपल भरे गए हैं, वह जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। 10 दिन में रिपोर्ट आ जाएगी, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
-विपिन कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी
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