ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए अनशनरत स्वामी सानंद के देहावसान के बाद आमरण अनशन कर रहे संत गोपालदास को प्रशासन ने शुक्रवार देर रात जबरन उठाकर एम्स ऋषिकेश में भर्ती करा दिया। वहीं संत गोपालदास ने किसी भी प्रकार के उपचार लेने से मना कर दिया।
गंगा के लिए एक विशेष एक्ट बनाने की मांग को लेकर स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल का अनशन के 112वें दिन ऋषिकेश एम्स में निधन हो गया था। शुक्रवार शाम जल पुरुष के साथ संत गोपालदास भी मातृसदन आए। वह 111 दिन से अलग-अलग स्थानों पर अनशन कर रहे थे। संत गोपालदास के मातृसदन पहुंचते ही खुफिया तंत्र और प्रशासन सतर्क हो गया था। प्रशासन ने शुक्रवार की रात करीब नौ बजे डाक्टरों की एक टीम संत गोपालदास की स्वास्थ्य जांच के लिए मातृसदन भेजी। डाक्टरों की टीम के जाने के तीन घंटे बाद किसी को सूचना दिए बिना ही रात करीब एक बजे तहसीलदार सुनैना राणा के नेतृत्व में एसओ कनखल सहित पुलिस बल मातृसदन पहुंचा। टीम ने स्वामी सानंद के कक्ष में सो रहे संत गोपालदास को सोते हुए ही उनके बिस्तर सहित ही उठाकर एम्स ले गए। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि संत गोपालदास ने किसी भी प्रकार की ड्रिप लगाने से मना कर दिया है। उन्होंने केवल आयुर्वेदिक दवा लेने के लिए ही हामी भरी है। स्वामी शिवानंद ने आशंका जताई है कि स्वामी सानंद की तरह ही गोपालदास भी एम्स में सुरक्षित नहीं हैं।