ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
धर्मनगरी में चल रहे अतिक्रमण हटाने के बाद से मजदूरों और राजमिस्त्रियों की मौज आई हुई है। शहर में मजदूर और राजमिस्त्री ढूंढे नहीं मिले रहे। इतना ही नहीं इस दौरान उन्होंने अपनी दिहाड़ी भी बढ़ा दी है। इसके अलावा वेेल्डिंग करनेवाले और कबाड़ियों को भी खूब काम मिल रहा है।
हरिद्वार में एक पखवाड़े से अधिक समय से अतिक्रमण हटाओ अभियान चल रहा है। इस दौरान कई जगह जेसीबी से तोड़फोड़ की गई। प्रभावित दुकानदार और मकान मालिक अब उसकी मरम्मत करा रहे हैं। इसके अलावा लाल निशान लगते ही लोग अपने आप ही कब्जों को तुड़वा रहे हैं। इसलिए शहर में मजदूरों और राजमिस्त्रियों की मांग बढ़ गई है। इसके मद्देनजर उन्होेंने भी अपनी दिहाड़ी बढ़ा दी है। मुंहमांगी दिहाड़ी देने के बाद भी लोगों को मजदूर नहीं मिल पा रहे। मुख्य सड़क की दुकान, मकान, होटल, धर्मशाला और आश्रमों के पक्के छज्जों को तोड़ने और सरिया काटने के लिए ड्रील मशीन के साथ एक मजदूर एक हजार रुपये से कम पर काम करने को तैयार नहीं। लोहे के साइनबोर्ड और होर्डिंग काटने ने और जोड़ने के लिए कटर के साथ वेल्डिंग वाले फुट के हिसाब से दाम तय कर रहे हैं। अतिक्रमण में चिह्नित होर्डिंग, लोहे की रेलिंग, टिन के छज्जों को निकाल कर ले जाने वाले कबाड़ी मालामाल हो रहे हैं। शुक्रवार से रेलवे रोड़ से शिवमूर्ति, ललतारौ, अपर रोड, हरकी पैड़ी होते हुए भीमगोडा, खड़खड़ी से दूधाधारी चौक तक लगभग छह किलोमीटर मुख्य मार्ग पर प्रशासन के अल्टीमेटम पर व्यापारियों ने मजदूर लगाकर तोड़फोड़ शुरू करा दी है। भीमगोडा में रोड और रेलवे लाइन के बीच के खोखा मालिक अपना सामान निकालकर ले गए हैं। कुछ ने रेलवे की रेलिंग को तोड़कर लाइन की तरफ सामान रख लिया है। कई आश्रम वालों ने भी मजदूर लगाकर अपनी बाउंड्री पर हथोड़ा बजाना शुरू कर दिया है।