ब्यूरो/अमर उजाला, मसूरी
पुरुकुल-मसूरी रोपवे परियोजना के तहत सर्वे करने शिफन कोर्ट पहुंची टीम को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि जब तक विस्थापितों को उचित स्थान पर शिफ्ट नहीं किया जाता, लोग भवन खाली नहीं करेंगे। बाद में निवर्तमान पालिका अध्यक्ष के समझाने पर लोग माने और विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम ने शिफन कोर्ट क्षेत्र का निरीक्षण कर 80 भवनों का चिह्नीकरण किया।
पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने बीते बुधवार को शिफन कोर्ट क्षेत्र का निरीक्षण किया था। उन्होंने जिलाधिकारी को निर्देश दिए थे कि एक माह के भीतर शिफन कोर्ट क्षेत्र में रहने वालों का सत्यापन और चिह्नीकरण कर रोपवे के लिए निर्धारित भूमि को खाली कराएं ताकि आगे की कार्रवाई शुरू हो सके। इसी कड़ी में शुक्रवार को प्रशासन, पर्यटन विभाग और एमडीडीए की संयुक्त टीम ने लाइब्रेरी स्थित शिफन कोर्ट में 80 भवनों का चिह्नीकरण किया।
हालांकि अधिकारियों को स्थानीय लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ा। सुंदरलाल टम्टा, मनीष, अलीशा, संजय कैंतुरा आदि का कहना है कि जब तक प्रशासन की ओर से यहां के लोगों को उचित स्थान पर शिफ्ट नहीं किया जाता, हम शिफन कोर्ट से भवन खाली नहीं करेंगे। इसके बाद मौके पर पहुंचे पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल ने कहा कि जब तक लोगों को शिफ्ट नहीं किया जाता, रोपवे का कार्य करना मुश्किल होगा। इस मौके पर एमडीडीए के सहायक अभियंता एसएस रावत, अवर अभियंता टीएस पंवार, पर्यटन विभाग से भरत सिंह रावत आदि मौजूद रहे।
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उच्चाधिकारियों के निर्देश पर शिफन कोर्ट का सर्वे किया गया। पहले दिन एक हिस्से में बने 80 भवनों का चिह्नीकरण किया गया। दो दिन और सर्वे का कार्य किया जाएगा।
-जसपाल सिंह राणा, नायब तहसीलदार