ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
लाखों खर्च करने के बाद भी प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीन नहीं लग पाई हैं। वहीं जिन स्कूलों में मशीन लगी भी हैं, उनका लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। इससे ज्यादातर स्कूलों में शिक्षिकों की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। वहीं हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी बायोमीट्रिक मशीन लगाने का काम तेज होने की उम्मीद है।
बता दें, शिक्षा विभाग ने करीब एक साल पहले 2141 इंटर कॉलेजों में बायोमीट्रक मशीनें लगवाई थीं। मशीनें लगाने पर एक करोड़ 60 लाख रुपये से अधिक की धनराशि खर्च हुई थी। उस दौरान विभाग ने बायोमीट्रिक उपस्थिति के आधार पर ही शिक्षकों व कर्मचारियों का वेतन जारी करने की बात कही थी, लेकिन अलग-अलग कारणों से यह ज्यादातर मशीनें शोपीस ही बनी रहीं और कई विद्यालयों की मशीनें खराब हो गईं।
अब हाईकोर्ट ने आदेश के बाद राज्य के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी बायोमीट्रिक मशीन लगाने की कवायद तेज हो गई है। कुल 12,565 प्राथमिक और 2500 से अधिक उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मशीनें लगनी है। अभी तक केवल एक हजार स्कूलों में मशीन लगी हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश पर उपस्थिति दर्ज नहीं हो रही है। इन मशीनों को लगाने पर विभाग लाखों रुपये खर्च कर चुका है।
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जिन विद्यालयों में मशीन लगी है। वहां उपस्थिति में अनिवार्य रूप से इसका इस्तेमाल किया जाएगा। अन्य छूटे विद्यालयों में मशीन लगाने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही सभी विद्यालयों में बायोमीट्रिक मशीन से उपस्थिति शुरू हो जाएगी।
-रामकृष्ण उनियाल, अपर निदेशक, माध्यमिक शिक्षा
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स्कूलों में गैरहाजिर मिले एक चौथाई बच्चे
प्रदेश के स्कूलों में शुक्रवार को आकस्मिक निरीक्षण के दौरान करीब एक चौथाई बच्चे गैरहाजिर मिले। कुल 497 स्कूलों के निरीक्षण में कुल पंजीकृत 41563 में से केवल 30993 छात्र ही उपस्थित मिले जबकि 10570 अनुपस्थित रहे। वहीं, कुल 2284 कार्यरत शिक्षकों में से 155 अनुपस्थित मिले। इसके अलावा केवल 67 स्कूलों में ही बायोमीट्रिक मशीनें लगी मिलीं और करीब 170 विद्यालयों में पाठ्य पुस्तकों की उपलब्धता नहीं मिली।