ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
इंजीनियरिंग के जिस मुकाबले में करीब 11.5 लाख छात्रों के बीच से केवल 2.24 लाख का चयन होना हो, उसकी राह वैसे तो बेहद मुश्किल मानी जाती है। लेकिन छह वर्षों में पहली बार ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेईई) मेन की कटऑफ में भारी गिरावट आने से छात्रों की राह आसान हो गई। गत वर्ष की तुलना में इस साल कटऑफ में सीधे सात अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। जेईई मेन परीक्षा में वर्ष 2013 में सामान्य की कटऑफ 113 अंक थी। तब छात्रों की बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। वर्ष 2014 में सामान्य की कटऑफ चढ़कर 115 पहुंच गई। इसके बाद 2014 से लगातार जेईई की कटऑफ नीचे जा रही है। इस बार विशेषज्ञों ने पहले ही कटऑफ 100 के आसपास आंकी थी, लेकिन कटऑफ सीधे सात अंक गिरकर 74 पर पहुंच गई है।
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दिव्यांगों को -35 अंकों पर मौका
इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा में इस साल दिव्यांगों के लिए कटऑफ -35 पर पहुंच गई है। यानी जिन छात्रों के शून्य से 35 अंक नीचे तक होंगे, वह भी जेईई एडवांस के लिए क्वालिफाई कर गए हैं। वह चाहें तो एडवांस का फॉर्म भर सकते हैं। पहली बार दिव्यांगों की कटऑफ शून्य से भी इतनी नीचे गई है।
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कटऑफ में बदलाव
वर्ष-सामान्य-ओबीसी-एससी-एसटी
2013-113-70-50-45
2014-115-75-55-47
2015-105-70-50-44
2016-100-70-52-48
2017-81-49-32-27
2018-74-45-29-24
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जेईई मेन में इस साल फिजिक्स के सवाल थोड़े मुश्किल थे। हालांकि, ओवरऑल देखें तो पेपर अच्छा था। किसी भी छात्र को बोनस अंक नहीं मिले हैं। इंजीनियरिंग में लगातार कटऑफ गिर रही है। इस साल भी इसका असर नजर आया है। दिव्यांग अभ्यर्थियों की कटऑफ तो -35 अंकों पर चली गई है।
-विपिन बलूनी, एमडी, बलूनी क्लासेज