ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस नेटवर्क (एमएफआइएन) और उद्योग संगठन की ओर से बृहस्पतिवार को आयोजित कार्यशाला मेें वित्त विशेषज्ञों ने राज्य की वित्तीय स्थिति के साथ ही आर्थिकी सुधारने समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। वित्त विशेषज्ञों ने पर्वतीय इलाकों में वित्तीय सेवाआें की बेहद कम पहुंच पर चिंता जताते हुए इस पर अधिक फोकस करने पर जोर दिया।
आईएसबीटी स्थित एक होटल में उत्तराखंड फिनक्लेव-2018 के तहत ‘उत्तराखंड में वित्तीय समावेशन की प्रगति और परिदृश्य’ विषय पर आयोजित सेमिनार में राज्य में वित्तीय समावेशन की स्थिति व मौजूद चुनौतियों एवं अवसरों पर भी चर्चा की गई। वित्त विशेषज्ञोें ने निवेश को बढ़ावा देने में माइक्रो फाइनेंस एवं फिनटेक की भूमिका पर विमर्श किया। वित्त सचिव अमित सिंह नेगी ने कहा कि राज्य की आर्थिक नीतियों के चलते प्रति व्यक्ति की आय में बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद पहाड़ी इलाकों में तमाम वित्तीय असमानताएं हैं। ये असमानताएं सर्विस सेक्टर को बढ़ावा देकर दूर की जा सकती हैं।
एमएफआइएन के अध्यक्ष राकेश दुबे ने कहा कि एनबीएफसी व एमएफआई जैसे स्मॉल फाइनेंस बैंक और वित्तीय संस्थानों ने राज्य में सरकार के वित्तीय एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार सबसे नया राज्य होने के बावजूद उत्तराखंड वर्तमान में वित्तीय समावेशन के मामले में देश में 12वें स्थान पर है। हालांकि यहां पहाड़ी जिलों में जहां 70 प्रतिशत आबादी निवास करती है वहां अभी वित्तीय सेवाओं की पहुंच आसान नहीं है। वित्तीय संस्थान और लोग ऐसी ही कई बाधाओं से जूझ रहे हैं। फिनटेक इन कठिनाइयों से पार पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। माइक्रो फाइनेंस इस वर्ग के लिए औपचारिक ऋण का महत्वपूर्ण स्रोत है और यह बिना गिरवी के लोन उपलब्ध कराता है। राज्य में शिशु कैटेगरी लोन के तहत मुद्रा ने लगभग 500 करोड़ रुपये का लोन बांटा है। सेमिनार को सुब्रत दास प्रादेशिक निदेशक आरबीआई, डीएन मागर सीजीएम नाबार्ड, राकेश दुबे प्रेसीडेंट एमएफआइएन, देवेश सचदेव, रमेश कुमार पंत एजीएम एसएलबीसी, एनके मैनी बोर्ड सदस्य मुद्रा, पूर्व डीएमडी सिडबी, संजय अग्रवाल, नवनीत कुमार, देव वर्मा, गोविंद सिंह, सुबीर कुमार मुखर्जी डीजीएम एसबीआई, डॉ. दीपांकर छाबरा, डॉ. सुमीत गुप्ता और डॉ. विनय समेत कई वित्त विशेषज्ञों ने संबोधित किया।