ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून।
शीशमबाड़ा सॉलिड वेस्ट एंड मैनेजमेंट प्रोसेसिंग प्लांट में मंगलवार से कूड़ा प्रोसेसिंग का काम शुरू हो गया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक और मेयर विनोद चमोली ने मशीन का बटन दबाकर प्लांट का शुभारंभ किया। 350 मीट्रिक टन क्षमता वाले प्लांट में शहर का 25 मीट्रिक टन कूड़ा पिछले एक माह से भेजा जा रहा है। कूड़े से जैविक खाद और आरडीएफ बनाया जाएगा। इसके बाद कैंट समेत आसपास की जगहों का भी कूड़ा प्लांट भेजे जाने का प्लान है।
मंगलवार को प्लांट परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि दिल्ली की तर्ज पर यहां भी कूड़े को ऊर्जा में तब्दील किया जाएगा। कहा कि यहां सात से आठ मेगावाट ऊर्जा पैदा हो सकती है। कहा सरकार सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने को हरसंभव प्रयास कर रही है।
अति विशिष्ट अतिथि शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर सरकार गंभीर थी। यहीं कारण है कि वर्षों से लटके इस प्रोजेक्ट को जल्द पूरा किया गया। कहा कि आने वाले समय में हरिद्वार, रुड़की आदि समेत अन्य जगहों का कूड़ा प्लांट में भेजा जाएगा। अध्यक्षता कर मेयर विनोद चमोली ने प्लांट को नगर निगम का ड्रीम प्रोजेक्ट बताया। उन्होंने कहा कि प्लांट के बनने से शहर के लोगों को कूड़े की समस्या से निजात मिलेगी। इस मौके पर राजपुर विधायक खजानदास, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष नीलम सहगल, भाजपा महानगर अध्यक्ष विनय गोयल, अनिल गोयल, नगर आयुक्त विजय कुमार जोगदंडे, अपर नगर आयुक्त नीरज जोशी, रैमकी कंपनी के नेशनल हेड राममोहन राव, प्रोजेक्ट मैनेजर मोहित द्विवेदी, वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कैलाश गुंज्याल, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सिंह, भाजपा नेता सुनील उनियाल गामा, पार्षद भूपेंद्र कठैत, सुशील गुप्ता, नीरू, सतीश कश्यप, राजेंद्र सिंह ढिल्लो आदि मौजूद रहे।
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कूड़े की बदबू पर नाराज हुए सीएम
देहरादून। प्लांट के उद्घाटन के दौरान वहां पड़े कूड़े से आ रही बदबू पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों से एंजाइम का छिड़काव कराने को कहा। इससे पहले सहसपुर विधायक सहदेव पुंडीर ने मंच से कहा कि कूड़े की बदबू से स्थानीय लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। ऐसे में अगर जनता को किसी तरह की कोई दिक्कत होती है तो उनका साथ देंगे। उन्होंने कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से कूड़े का निस्तारण करने को कहा, जिससे इलाके में बदबू न फैले।
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मंच पर पार्षद से भिड़ा गामा समर्थक
कार्यक्रम के दौरान मंच पर भाजपा नेता सुनील उनियाल गामा का समर्थक एक पार्षद से भिड़ गया। दोनों में काफी बहस हुई। इसके बाद मेयर विनोद चमोली और अन्य के हस्तक्षेप के बाद दोनों शांत हुए।
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सम्मानित नहीं करने से पार्षद नाराज
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के शुभारंभ पर पार्षद खुद को सम्मानित नहीं किए जाने पर नाराज दिखे। उनका कहना था कि जब प्लांट को लेकर काफी विवाद चल रहा था। तब पार्षदों ने मिलकर मामले का समाधान करने में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे में उन्हें सम्मानित किया जाना था।
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कैंट बोर्ड का कूड़ा भी जाएगा प्लांट
क्लेमेंटटाउन कैंट बोर्ड का कूड़ा भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में आएगा। इसे लेकर जल्द ही नगर निगम और बोर्ड के बीच अनुबंध होने वाला है। भाजपा नेता महेश पांडे ने बताया कि ऐसा होने से करीब 37 हजार की आबादी को फायदा मिलेगा।
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वाटरप्रूफ मंच में रहे नेता, लोग भीगते रहे
कंपनी की ओर से मुख्यमंत्री व अन्य नेताओं के लिए वाटरप्रूफ मंच बनाया गया था। जबकि मैदान में सामान्य टेंट लगा था। बारिश के चलते पहले ही लोग कम संख्या में पहुंचे थे। नेता जहां वाटरप्रूफ मंच में रहे, वहीं लोग बारिश में भीगते रहे। व्यवस्था न होने पर उन्होंने नाराजगी जताई।
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बारिश के चलते नहीं उमड़ी भीड़
भाजपाई कहीं न कहीं इस कार्यक्रम को चुनावी तैयारी का रूप देना चाहते थे। इसी के चलते बीते दिनों भाजपा महानगर अध्यक्ष विनय गोयल ने बैठक कर हर वार्ड से 50 व्यक्ति लाने के निर्देश दिए थे। लेकिन, मौसम खराब होने के चलते करीब डेढ़ हजार लोग ही सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के उद्घाटन के अवसर पर पहुंच सके।
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ऐसा प्रोसेस होगा कूड़ा
पहले प्लांट में मौजूद वेब्रिज में कूड़े को तौला जाएगा। इसके बाद उसे टिपिंग फ्लोर में तीन दिन तक रखा जाएगा। जहां से उसे चैंबर में डाला जाएगा। जिसमें नीचे से 28 दिन तक गर्म हवा दी जाएगी। लीचेड को कलेक्ट कर ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाएगा। फिर कूड़े को 75 एमएम के ट्रॉमल पर प्रोसेस के लिए भेज दिया जाएगा। 75 एमएम (मिलीमीटर) के ऊपर का मैटेरियल आरडीएफ बनाने के लिए भेजा जाएगा। 75 एमएम का कूड़ा 25 एमएम के ट्रॉमल में आगे के प्रोसेस के लिए भेज दिया जाएगा। 25 एमएम से अधिक का कूड़ा आरडीएफ और सांइटिफिक लैंड फिल में चला जाएगा। वहीं, 25 एमएम से नीचे का कूड़ा चार एमएम के ट्रॉमल में जाएगा। इससे कम का कूड़ा खाद बन जाएगी। चार एमएम से ऊपर का कूड़ा साइंटिफिक लैंड फिल में जाएगा।