गो पालकों के घर में होता है भगवान श्रीकृष्ण का वास
-- त्रिवेणीघाट पर गो कथा का तीसरा दिन, संत गोपालमणि ने बताई गो माता की महत्ता
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। गाय माता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है, उसे पशु मात्र समझना उचित नहीं है। गो माता देवतुल्य है। जो लोग गो माता से जुड़ जाते हैं, उन्हें दैवीय संपदा प्राप्त होती है। गौ पालने वाले लोगों के घर में साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का वास होता है। यह विचार मध्य हिमालय के प्रख्यात संत गोपालमणि महाराज ने त्रिवेणीघाट पर आयोजित गो कथा के तीसरे दिन रविवार को व्यक्त किए। उन्होंने प्रवचन करते हुए कहा कि वेद माता गायत्री है और गायत्री ही गो है। गाय पशु है, तो उसे बचा कौन सकता है और अगर गो माता है तो उसे मार कौन सकता है। इसलिए गाय को माता की प्रतिष्ठा देने के लिए हमें हनुमान बनना पड़ेगा।
कहा कि गाय के गो मूत्र, दूध और घी में सोना पाया जाता है। गाय अनुदान की भूखी नहीं है वह सम्मान चाहती है। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गो माता के गोबर से धन निकालकर सोने के मकान बना दिए थे। इसलिए हम भी गोबर से धन निकाले। गोबर की गैस से गाड़ियों और रसोई गैस बन सकती है। इसके साथ ही सर्वोत्तम खाद भी गोबर की ही होती है। इस दौरान आचार्य कुलानंद कंसवाल ने लोगों से गो को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने के लिए 18 फरवरी को दिल्ली स्थित रामलीला मैदान पहुंचने का आह्वान किया। कथा में सीता शरण, आरके सूरी, चंदना साधुका, आदि मौजूद थे।