ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादूून
कवि कुंभ पत्रिका की ओर से शनिवार को डॉ. गिरिजा शंकर त्रिवेदी की जयंती पर काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनाईं। मुख्य अतिथि डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने तुम बदले संबोधन बदले लेकिन मन की बात वही है... रचना सुनाकर खूब तालियां बटोरी।
शनिवार को प्रीतम रोड स्थित पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के आवास पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। पहले सत्र में डॉ. गिरिजा शंकर त्रिवेदी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा हुई। कवियत्री रंजीता सिंह की पुस्तक शब्द कविकुंभ का लोकार्पण भी किया गया। इसके बाद आयोजित काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ. सुुधारानी पांडे ने की। जय प्रकाश त्रिपाठी ने इधर खालीपन है उधर खालीपन है कहीं कुछ नहीं है तो क्यों कुछ नहीं है.., रंजीता सिंह ने शिद्दते दर्द को बेअसर देखा जब्त करने का मेरा हिंसर देखा.., डॉ. रामविनय सिंह ने झुलसे-झुलसे फूल रो रहे हैं चंदन वन में... और विद्या सिंह ने पलक-पलक पर सपन सुखों के आंख-आंख में पानी है... रचनाएं प्रस्तुत कीं।
डॉ. नीलप्रभा वर्मा, डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई, सुरेश व्याला, शादाब अली, आशुतोष मिश्रा, सतीश बंसल, प्रभा वर्मा, नीता कुकरेती, ज्ञानेंद्र, राघवेश पांडे, अंबर खरबंदा, कांता घिल्डियाल और शिवमोहन सिंह ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि डॉ. असिम शुक्ला, ब्रिगेडियर केजी बहल, रजनीश त्रिवेदी, सुनीत त्रिवेदी आदि मौजूद रहे।