रुड़की। हरिद्वार जिले में दो और शिक्षकों के प्रमाणपत्र एसआईटी की जांच में फर्जी पाए गए हैं। जांच प्रभारी ने विभागीय अधिकारियों को दोनों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दे दिए हैं। आरोपी एक शिक्षिका राजकीय प्राथमिक विद्यालय बादशाहपुर की हैं। जबकि दूसरा शिक्षक लक्सर ब्लॉक के खड़ंजा कुतुबपुर में तैनात है।
एसआईटी की जांच में फर्जी शिक्षकों के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। शुक्रवार को दो और शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने की बात सामने आई है। इनमें से एक शिक्षक बहादराबाद ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय बादशाहपुर के है। इस विद्यालय की प्रधानाध्यापिका कुमकुम भटनागर के शैक्षिक प्रमाणपत्र की जांच कई दिनों से एसआईटी की ओर से की जा रही थी। आरोपी शिक्षिका ने वर्ष 1984 में अनुक्रमांक 24215 पर बिजनौर से बीटीसी की डिग्री अपनी नौकरी में दर्शाई है, लेकिन यह डिग्री जांच में फर्जी पाई गई है। कुमकुम भटनागर वर्ष 1995 से पढ़ा रही हैं।
दूसरा मामला लक्सर ब्लॉक के खड़ंजा कुतुबपुर में तैनात शिक्षक सुशील का है। सुशील के स्थायी निवास प्रमाणपत्र को लेकर शिकायत थी। सुशील ने रुड़की तहसील से जारी स्थायी प्रमाणपत्र दर्शाया था, लेकिन इस प्रमाणपत्र को लेकर विरोधाभास था। जिसके चलते इसकी जांच ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की नितिका खंडेलवाल को सौंपी गई थी। इन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया कि प्रमाणपत्र तहसील से जारी किया गया था, लेकिन तहसील में प्रमाणपत्र संबंधी अभिलेख तहसील में नहीं मिले। इस पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर एसआईटी ने माना कि सुशील का स्थायी प्रमाणपत्र पूरी तरह फर्जी था। इसका तहसील में कहीं कोई लेखाजोखा नहीं है। एसआईटी जांच प्रभारी श्वेता चौबे ने दोनों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई के आदेश विभागीय अधिकारियों को दे दिए हैं।
बादशाहपुर में तैनात कुमकुम भटनागर की बीटीसी की डिग्री जांच में फर्जी पाई गई है। जबकि खड़ंजा कुतुबपुर में तैनात शिक्षक सुशील का स्थायी निवास प्रमाणपत्र जांच के बाद रुड़की ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की ओर से निरस्त कर दिया है। इस पर दोनों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई के आदेश विभागीय अधिकारियों को दे दिए हैं।
-श्वेता चौबे, एसआईटी जांच प्रभारी