महालेखा परीक्षक ने उठाए पिटकुल पर सवाल
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) में आला अफसर प्रावधानों को दरकिनार कर टेंडर जारी कर रहे हैं। अफसरों की इस मनमानी पर महालेखा परीक्षक ने अपनी जांच रिपोर्ट में कड़ी आपत्ति जताई है। साथ ही प्रस्तावित योजनाओं में लेटलतीफी पर भी सवालिया निशान उठाए हैं। इसके साथ ही महालेखा परीक्षक ने रिपोर्ट में पिटकुल प्रबंधन की ओर से समझौतों को निरस्त करने पर भी सवालिया निशान खड़े किए हैं। इस पर सरकार एक कार्रवाई करेंगी, इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
महालेखा परीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि पिटकुल प्रबंधन को प्रावधानों के तहत कोई भी टेंडर जारी करने से पहले कंपनियों के साथ ‘प्री बिड’ मीटिंग करनी चाहिए ताकि निविदा से जुड़ी तमाम समस्याओं का समाधान किया जा सके। लेखा परीक्षण के दौरान यह बात सामने आई है कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में पिटकुल प्रबंधन की ओर से 14 परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले कई परियोजनाओं में प्री बिड मीटिंग नहीं की गई जो आपत्तिजनक है। लेखा परीक्षण में यह भी सामने आया है कि चार परियोजनाओं में तीन या इससे कम कंपनियों ने आवेदन किया है।
महालेखा परीक्षक ने रिपोर्ट में ट्रांसमिशन परियोजनाओं को देर से शुरू किए जाने पर भी सवाल उठाएं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2017-18 में पिटकुल ने परियोजनाओं से जुड़े कुल 17 समझौते किए। इनमें से नौ समझौतों में लेटर ऑफ अवार्ड देने में छह माह से अधिक का समय लगा। जबकि छह परियोजनाओं में एक साल से अधिक का वक्त लगा। महालेखा परीक्षक ने रिपोर्ट में समझौतों को निरस्त करने पर भी सवाल उठाएं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पिटकुल प्रबंधन ने वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2017-18 के बीच छह बड़े समझौते निरस्त किए जिसमें से पांच का निरस्तीकरण ठेकेदारों की गलती के चलते हुआ। इन समझौतों को निरस्त हो जाने से 764.03 करोड़ की परियोजनाएं अटक गईं हैं, जो गंभीर मामला है।