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13 महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार

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13 महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शुक्रवार को आईसीडीएस निदेशालय भवन में प्रदेश की 13 महिलाओं को राज्य स्त्री शक्ति तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया। वहीं, 20 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को राज्य स्तरीय कार्यकत्री पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने तीलू रौतेली के जन्मदिन के मौके पर हर वर्ष आठ अगस्त को सम्मान समारोह आयोजित करने की घोषणा की। वहीं, देहरादून में 500 बेड का जच्चा-बच्चा अस्पताल खोलने की भी घोषणा की।
प्रेम नगर स्थित नंदा की चौकी निकट निदेशालय महिला सशक्तिकरण में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि राज्य निर्माण आंदोलन से लेकर पर्यावरण, समाज सुधार आदि में महिलाओं का अहम योगदान रहा है। इसी तरह तीलू रौतेली अद्वितीय वीरांगनाआें में से एक हैं। जिन्हें उनकी वीरता के कारण गढ़वाल की रानी लक्ष्मी बाई के नाम से पुकारा जाता है। उनकी सरकार ऐसी वीरांगनाओं का सम्मान करती है।
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उन्होंने तीन तलाक के मसले पर काशीपुर की शायरा बानो की लड़ाई की सराहना की। कहा कि वर्ष 2015 में पति द्वारा तीन तलाक दिए जाने के बाद उन्होंने अपने हक की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी, जिसमें जीतकर लाखों महिलाओं का भविष्य सुरक्षित किया। प्रदेश की महिलाएं अपने हुनर और कार्यों के जरिये दुनिया भर में नाम रोशन कर रही हैं। सीएम ने कहा कि बहुत सी ऐसी महिलाएं जो बहुत अच्छा कार्य कर रही हैं, ऐसी महिलाओं को भी आगे लाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने महिलाओं से समाज में व्याप्त समस्याओं को दूर करने के लिए आगे आने का आह्वान किया।
इसके बाद उन्होंने 13 महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार के तहत 21 हजार की धनराशि का चेक व प्रशस्ति पत्र दिया, जबकि 20 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को 10 हजार की धनराशि का चेक व प्रशस्ति पत्र दिया। विशिष्ट अतिथि महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्या ने कहा कि आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। वह साइकिल से लेकर हेलीकॉप्टर तक चला रही हैं। महिलाएं हर चुनौती का सामना कर रही हैं।
बता दें कि वर्ष 2017-18 के लिए बाल एवं महिला विकास निदेशालय की ओर से 13 महिलाओं के नामों की घोषणा की गई थी। जिनमें उत्तरकाशी से तीन, देहरादून व ऊधमसिंह नगर से दो-दो महिलाओं का चयन हुआ। वहीं, अल्मोड़ा, बागेश्वर, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग से एक-एक महिलाएं तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए चुनी गईं थी। जिनको शुक्रवार को पुरस्कृत किया गया। इस मौके पर सहसपुर विधायक सहदेव पुंडीर, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशक रणवीर सिंह चौहान, बाल आयोग की सदस्य सीमा डोरा आदि मौजूद रहीं।
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तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित महिलाएं
नाम जिला
शायरा बानो ऊधमसिंह नगर
हेमलता भट्ट अल्मोड़ा
पल्लवी उप्रेती बागेश्वर
अंजू देहरादून
मृणालिका अत्रेय देहरादून
डॉ. पुष्पा रानी वर्मा हरिद्वार
त्रितिक्षा कपिल नैनीताल
हेमा थलाल पिथौरागढ़
उपासना सेमवाल रुद्रप्रयाग
निर्मला ऊधमसिंह नगर
छब्बी देवी उत्तरकाशी
सविता चमोली उत्तरकाशी
उषा किरण बिष्ट उत्तरकाशी
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सम्मानित की गईं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां
नाम जिला
शबनम खातून अल्मोड़ा
आशा आर्य अल्मोड़ा
शिखा जोशी बागेश्वर
आशा चमोली
नीतू नेगी देहरादून
पिंकी देवी देहरादून
रितेश हरिद्वार
रुकमणि खरे हरिद्वार
उर्मिला हरिद्वार
अनिता चौहान नैनीताल
प्रेमा जोशी नैनीताल
मीनाक्षी नैथानी पौड़ी
कविता देवी पौड़ी
लक्ष्मी देवी पंवार पौड़ी
हेमलता देवी रुद्रप्रयाग
रेखा भट्ट टिहरी
ममता टिहरी
रंजीता अरोड़ा ऊधमसिंह नगर
सीमा सैनी ऊधमसिंह नगर
उत्तरकाशी विमला देवी
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चार जिलों से नहीं पहुंचे आवेदन
तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए प्रदेश के चार जिलों से कोई भी आवेदन नहीं पहुंचे। ये पौड़ी, चमोली, चंपावत और टिहरी जिले हैं। महिला सशक्तिकरण विभाग के निदेशक रणवीर सिंह चौहान ने बताया कि इन जिलों से आवेदन नहीं मिलने के चलते यहां से किसी को भी पुरस्कृत नहीं किया गया।
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जानिये तीलू रौतेली के बारे में
तीलू रौतेली, गढ़वाल की ऐसी वीरांगना थीं, जो महज 15 वर्ष की उम्र में रणभूमि में कूद पड़ी थी। उनका जन्म आठ अगस्त सन 1661 को हुआ था। उनका बचपन बीरोंखाल के कांडा मल्ला गांव में बीता। उनके पिता भूप सिंह गढ़वाल नरेश की सेना में थे। उन्होंने कई वर्ष तक दुश्मन राजाओं को छठी का दूध याद दिलाया था। 15 से 20 वर्ष की आयु तक सात युद्ध लड़ने वाली तीलू विश्व की एकमात्र वीरांगना हैं। एक बार युद्ध में शत्रुओं को हराने के बाद वह वापस लौट रही थीं। कांडा गांव के पास हार से अपमानित रामू रजवार नाम के कन्त्यूरी सैनिक ने उन पर तलवार से हमला कर दिया था। जिसके बाद 22 वर्ष की आयु में वह वीरगति को प्राप्त हुईं। उनकी याद में आज भी कांडा ग्राम व बीरोंखाल क्षेत्र के लोग कौथिग मेला आयोजित करते हैं।
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