ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
महाशिवरात्रि के लिए राजधानी के मंदिर और शिवालय सजने लगे हैं। रविवार को सभी मंदिरों में साफ-सफाई के बाद सजावट की गई है। आज से मंदिरों और शिवालयों में भगवान शिव का पूजन शुरू हो जाएगा। आधी रात के बाद विशेष-पूजा अर्चना होगी, जिसके बाद श्रद्धालु जलाभिषेक कर महादेव का आशीर्वाद ले सकेंगे।
टपकेश्वर महादेव मंदिर में हर साल की तरह भव्य महाशिवरात्रि मेला आयोजित किया जाएगा। मंदिर के महंत कृष्ण गिरी ने बताया कि सोमवार रात 12 बजे से महादेव का पूजन शुरू हो जाएगा। इसके बाद मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शनों और जलाभिषेक के लिए खोल दिया जाएगा। रात से ही 51 कुंतल केसर वाला भोग श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए कुट्टू की पकौड़ी का वितरण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सुरक्षा और श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। इसमें कैंट बोर्ड और पुलिस प्रशासन पूरा सहयोग कर रहा है।
वहीं, पृथ्वीनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि पर 51 प्रकार की पूजन सामग्री से सामूहिक रुद्राभिषेक किया जाएगा। सेवादार संजय गर्ग ने बताया कि सोमवार को 21 दीयों और रंगोली से भोले बाबा का श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद उनका आह्वान होगा। गंगा जल और भांग, धतूरा, रोली, मोली, दूध, दही, पान समेत 51 प्रकार की पूजन सामग्री से बाबा का सामूहिक रुद्राभिषेक होगा। तीन से चार घंटे तक चलने वाले इस पूजन के बाद प्रात: कालीन आरती होगी। इसके बाद आम श्रद्धालु जलाभिषेक करेंगे। दिनभर मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खुला रहेगा। दिन में रीति-रिवाज के साथ मंदिर का धार्मिक ध्वज बदला जाएगा। साथ ही त्रिशूल की स्थापना भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि मंदिर में पूरे दिन भजन-कीर्तन और महा मृत्युंजय जप होगा।
शाम को विशेष पूजा-अर्चना और मखाने की खीर वितरित की जाएगी। रविवार को 150 से अधिक सेवादार मंदिर के श्रृंगार में जुटे रहे। यह महाशिवरात्रि के बाद तक व्यवस्थाओं में सहयोग करेंगे। गढ़ी डाकरा स्थित प्राचीन श्री नागेश्वर महादेव मंदिर में महंत विश्व नाथ योगी के सान्निध्य में नगर परिक्रमा की गई। सोमवार रात नौ बजे से भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना शुरू हो जाएगी। रात 12 बजे से विशेष पूजा-अर्चना होगी, जिसके बाद श्रद्धालु जलाभिषेक कर सकेंगे।
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कांवड़ियों के लिए अलग इंतजाम
पृथ्वीनाथ मंदिर में कांवड़ियों के जलाभिषेक के लिए अलग इंतजाम किए गए हैं। सेवादार संजय गर्ग ने बताया कि कांवड़ियों को अलग द्वार से पवित्र शिवलिंग की ओर भेजा जाएगा। वहीं, दिव्यांग और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के दर्शनों के लिए भी विशेष व्यवस्था की जाएगी।
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अन्य मंदिरों में भी होंगे आयोजन
शहर के अन्य मंदिरों और शिवालयों में भी महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक किया जाएगा। केदारपुर स्थित सिद्धेश्वर मंदिर, धौलेश्वर महादेव, प्राचीन श्री गोरक्षनाथ नागेश्वर महादेव मंदिर समेत अन्य सभी शिवालयों में श्रद्धालु महाशिवरात्रि मनाएंगे।
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फोटो-- (डा. संतोष खंडूडी)
प्रदोष काल में पूजा का विशेष लाभ
भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में विशेष फलदाई मानी जाती है। इस वक्त पूजा करने से पूरी रात पूजा के बराबर फल मिलता है। करीब 51 मिनट की इस पूजा में साधक को वर्षभर की पूजा का लाभ मिलता है। प्रदोष काल की पूजा विशेष कामना की पूर्ति के लिए की जाती है। धर्माचार्य आचार्य डॉ.संतोष खंडूड़ी ने बताया कि बहुत से श्रद्धालु महाशिवरात्रि पर पूरी रात या वर्षभर भगवान शिव का पूजन नहीं कर सकते। ऐसे श्रद्धालु प्रदोष काल में पूजा-अर्चना कर वर्षभर की पूजा का फल प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक मुहूर्त में पूजा का समय भी अलग-अलग होता है। उस समय विशेष पूजा करने से फल कामना की पूर्ति होती है।
महाशिवरात्रि प्रदोष काल की पूजा का समय : रात्रि 12:09 बजे से 1:01 बजे तक (कुल 51 मिनट का मुहूर्त रहेगा।)
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(13 फरवरी की रात को पूजा का मुहूर्त)
रात को पहले पहर में पूजा का मुहूर्त : 6:05 से 9:20
रात को दूसरे पहर में पूजा का मुहूर्त : 9:20 से 12:35
रात को तीसरे पहर में पूजा का मुहूर्त : 12:35 से 3:49
रात को चौथे पहर में पूजा का मुहूर्त : तड़के 3:49 से 5:04